वाराणसी : चंद्रयान-3 की सफलता के बाद भारत ने शनिवार को अपने पहले सूर्य मिशन ‘आदित्य एल-1’ को सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया। प्रक्षेपण भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के रॉकेट पीएसएलवी-सी57 से किया गया।
इस अभियान के साक्षी चिकित्सा संस्थान, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के विद्यार्थी भी बने। इसरो के सूर्य मिशन आदित्य एल-1 के लॉन्च के प्रसारण की व्यवस्था विज्ञान संस्थान के सभागार में की गई थी। जिसे बड़ी संख्या में विद्यार्थियों व शिक्षकों ने देखा। गौरतलब हो कि इस ऐतिहासिक अभियान में बीएचयू और आईआईटी बीएचयू के तीन वैज्ञानिक आदित्य एल -1 अभियान में इसरो की टीम का हिस्सा हैं।
बीएचयू के भौतिकी विज्ञान विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ अलकेंद्र सिंह और आईआईटी बीएचयू के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ अभिषेक श्रीवास्तव मिशन के सोलर अल्ट्रावॉयलेट इमेजिंग टेलीस्कोप टीम से जुड़े हैं। सूर्य के अध्ययन के लिए ‘आदित्य एल-1′ को धरती से 15 लाख किलोमीटर दूर ‘लैग्रेंजियन-1′ बिंदु तक पहुंचने में 125 दिन लगेंगे। गौरतलब हो कि एल-1 प्वाइंट पर फिलहाल दुनिया का एकमात्र उपग्रह नासा और ईसा का सोहो (सोलर एंड हेलीयोस्फेयरिक ऑब्जर्वेटरी) मौजूद है।
आदित्य एल-1 यहां पहुंचने वाला दूसरा उपग्रह होगा। इससे पहले दुनियाभर से 22 सोलर मिशन लांच हुए हैं। उनमें अमेरिका की पायनियर सीरीज, जर्मनी की हेलियो, ईसा की यूलाइसिस और नासा की जेनेसिस, स्टीरियो और पार्कर शामिल हैं।


