बीकानेर : ‘बादलों ने सूरज के आगे पहरा बिठा रखा है। ताकीद कर दी कि अपनी तल्ख किरणों से धरती को परेशान न करें। खुद हवा पर सवार हो सैर को निकल पड़े। जब, जहां जी-चाहा बूंदे बन धरती को चूम लेते हैं। निहाल होती, शरमाती धरती हरियाली चादर ओढकर मुसकुराने लगी है। यह सब देख धरतीपुत्रों यानी किसानों के भी चेहरे खिल उठे हैं।’
कुछ ऐसा ही कहा जा सकता है मानसून के दौर में लगातार चल रही बूंदाबांदी, बौछारें, मूसलाधार और इसके फलस्वरूप दूर तक फैली हरियाली को देखकर। जहां बीहड़ या रोही है वहां घास उग आई है। जहां खेत है वहां फसलों की कोंपले फूट पड़ी हैं। नाल जैसे इलाके में मूंगफली के बीच ‘निनाण‘ यानी खरपतवार निकालने तक का काम होने लगा है। गोचर में सेवण लहलहाते देख गो-प्रेमियों का दिल खुश है। तालाब लबालब है। इनमें गंठे लगाते लोग सावन के महीने में महादेव के जयकारे लगा रहे हैं ‘नमह पारवती पतै हर..हर..हर.. महादे…व‘। गोठों में सबड़के लिए जा रहे हैं।
बीकानेर संभाग में 32.8 प्रतिशत ज्यादा बारिश
सिर्फ बीकानेर संभाग की ही बात करें तो यहां सामान्यतया एक जून से 26 जुलाई तक 128.85 मिमी बारिश होती है। इस बार अब तक 171.17 मिमी बारिश हो चुकी है। यानी सामान्य से 32.8 प्रतिशत जयादा। बीकानेर जिले में 122 मिमी बारिश होती है। इस वर्ष 176.89 मिमी बरसात हो चुकी हैं। मतलब यह कि सामान्य से 44.3 प्रतिशत ज्यादा। इसी तरह चूरू में 27, श्रीगंगानगर मंे 47.8 और हनुमानगढ में 17.9 प्रतिशत ज्यादा बारिश हो चुकी है।
09 जिलों में अत्यधिक, 13 में ज्यादा, 10 में सामान्य बारिश
मानसून इस बार अब तक राजस्थान में इतना मेहरबान है कि जैसलमेर को छोड़ प्रदेश के सभी जिलों में सामान्य या इससे अधिक बारिश है। प्रदेश के नौ जिलों में अत्यधिक बारिश हो चुकी है। इनमें औसत से 60 प्रतिशत और उससे भी ज्यादा बारिश हो चुकी है। बीकानेर सहित 13 जिलों में औसत से अधिक बारिश हुई है। प्रदेश के 10 जिलो में सामान्य बारिश हुई है। सामान्यतया प्रदेशभर में 1 जून से 26 जुलाई तक 229.38 मिमी बारिश होती है। इस बार 339.74 मिमी बरसात हो चुकी है। मतलब यह कि सामान्य से 48.1 प्रतिशत ज्यादा।
सबसे ज्यादा कोलायत, सबसे कम खाजूवाला में बारिश


