जयपुर : राजस्थान हाईकोर्ट ने विवाहित बेटी को अनुकंपा नियुक्ति नहीं देने पर संयुक्त सहकारिता सचिव और राज्य सहकारी अधिकरण के अध्यक्ष से जवाब तलब किया है। अदालत ने दोनों अधिकारियों से यह बताने को कहा है कि उन्होंने मृत कर्मचारी की विवाहित बेटी को अनुकंपा नियुक्ति क्यों नहीं दी। जस्टिस सुदेश बंसल की एकलपीठ ने यह आदेश मेघा बिष्ट की याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए दिए।
याचिका में कहा गया कि याचिकाकर्ता के पिता जगत सिंह राज्य सहकारी अधिकरण में सहायक कर्मचारी थे और सेवा के दौरान उनकी 31 जुलाई 2020 को मृत्यु हो गई। उसने पिता की जगह अनुकंपा नियुक्ति के लिए अधिकरण में यह कहते हुए आवेदन किया वह अपनी जीवित मां का भरण-पोषण करेगी और यदि वह भरण-पोषण नहीं करे तो उसकी सेवाएं खत्म कर दी जाए। इसके बावजूद अधिकरण ने उसे अनुकंपा नियुक्ति के अपात्र बताते हुए उसके आवेदन को खारिज कर दिया। याचिका में कहा गया कि उसकी मां बीमार महिला है और सरकार की नौकरी नहीं कर सकती है। इसके अलावा उसका भाई जयपुर से बाहर एक निजी सेवा में है। परिवार में ऐसा कोई भी नहीं है जिसे आश्रित मानकर अनुकंपा नियुक्ति दी जाए। वहीं विवाहित बेटी को अनुकंपा नियुक्ति से वंचित करना भारत के संविधान के अनुच्छेद 14, 16 एवं 39 (ए) का हनन है। किसी महिला नागरिक को केवल लिंग के आधार पर अनुकंपा नियुक्ति से वंचित नहीं किया जा सकता। इसलिए उसे अनुकंपा नियुक्ति दी जाए। जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया है।


