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Banda : अनूठा सत्याग्रह: ग्रामीण गृहस्थी का सामान लेकर अनशन स्थल पर डटे, गांव छोड़ने की धमकी

बांदा : संपर्क मार्ग, स्कूल की मांग को लेकर राजाराम पुरवा में चल रहा महिलाओं का सत्याग्रह तीसरे दिन भी जारी रहा। गांव की मूलभूत सुविधाओं से बेखबर प्रशासन व जनप्रतिनिधियों से क्षुब्ध ग्रामीण आज भी अपने घर गृहस्थी उठा कर ही सत्याग्रह में बैठ गए। सत्याग्रह में बैठे महिला पुरुषों के हाथ में फावड़ा कुदारी, तसला, खाना बनाने के बर्तन दूधमुंहे बच्चे, बकरी सब साथ में थे। सब नारे लगा रहे थे ‘गरीब गांव में रोते हैं। अफसर नेता घर में सोते हैं। जिस गांव में जुर्म का डेरा हो, वह गांव हमें मंजूर नहीं।’

वार्ता करने पर उन्होंने बताया कि यह सभी लोग मजदूरी करके अपना पेट भरते हैं। रोज का खाना रोज कमाना लोगों की जिंदगी है। शिक्षा स्वास्थ्य, रोजगार जैसी मूलभूत सुविधाएं हर जरूरतमंद व्यक्ति तक आसानी से पहुंचाने का सरकार दावा कर रही है। आज उसी सरकार के अधिकारी कर्मचारी सरकारी दावों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। यहां न लोगों के पास रोजगार है न ही शिक्षा के लिए कोई अवसर। गांव तक पहुंचने के लिए संपर्क मार्ग भी नहीं है। इन्हीं मुद्दों को लेकर हमारा सत्याग्रह है, किंतु आज तक किसी ने हमारी सुध तक नहीं लिया। लोग भुखमरी की कगार पर खड़े हैं। आज हम सब लोग अपने घर गृहस्थी का सामान लेकर अनशन स्थल पर आ गए हैं। यदि प्रशासन जल्द हमारी मांगों का संज्ञान नहीं लेता, तो यहीं से हम अपना गांव छोड़कर चले जाएंगे। गांव छोड़ने की सूचना हम जिला प्रशासन को भेज रहे हैं।

श्यामकली ने बताया कि यहां सुबह लेखपाल आया था। सब को डरा धमका रहा था। सभी को कह कर गया है कि सभी लोग अनशन करके अपने अपने घर जाओ, नहीं ऐसी कलम चलाऊंगा कि जिंदगी भर याद रखोगे। ग्रामीण मनोज कुमार ने बताया कि अधिकारी गांव तक आते हैं, अनशन समाप्त करने की बात करते हैं किंतु समस्याओं के समाधान की कोई बात नहीं करता है। वंदना ने बताया कि यह आंदोलन किसी के व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं है। हमारे सभी सामाजिक मुद्दे हैं किंतु इन मुद्दों को भी सरकार सुनने को तैयार नहीं है। कल चुनाव में जो नेता हमारे गांव आते थे सड़क और स्कूल बनवाने का वादा करके हम से वोट मांगते थे। आज उनका भी कहीं अता पता नहीं है। अगले चुनाव में जब भी ये नेता आएंगे उनसे पूरा हिसाब मांगा जाएगा।

वही चिंगारी संगठन की संयोजिका मुबीना ने कहा कि लोग पिछले कई दिनों से लोकहित के मुद्दों को लेकर सत्याग्रह कर रहे हैं। किंतु प्रशासन व जनप्रतिनिधियों की तरफ से कोई पहल नहीं की गई। इससे लगता है कि इस तरह के मुद्दों में न तो प्रशासन का ध्यान है न ही जनप्रतिनिधियों का। इस समस्या का तत्काल समाधान किया जाना चाहिए।

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