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Ballia: दर्शक भले ही कम हुए, रामलीला के पात्रों की जिजिविषा नहीं हुई कम

दरभंगा के रामलीला कलाकारों ने सनातन संस्कृति के प्रसार को बनाया है जीवन का उद्देश्य

बलिया:(Ballia) टीवी और मोबाइल के दौर में रामलीला देखने वाले दर्शक भले ही कम हो गए हैं, दरभंगा की रामलीला कलाकार हतोत्साहित नहीं हुए हैं। उनके लिए रोजी-रोटी से अधिक भगवान राम के आदर्शों का प्रचार करना अधिक महत्वपूर्ण है।

जिला मुख्यालय से करीब 35 किलोमीटर दूर गड़हांचल के बघौना में इन दिनों रामलीला का मंचन चल रहा है। कम दर्शक संख्या के बावजूद दरभंगा से आए रामलीला कलाकारों का उत्साह कम नहीं हुआ है। वे इसे जीविकोपार्जन के साथ-साथ मर्यादा पुरुषोत्तम राम के चरित्र के प्रचार-प्रसार का जरिया मानते हैं। दरभंगा के पतोर से आए पन्द्रह कलाकारों की कमेटी का संचालन दीपू मिश्रा करते हैं। कुल 15 लोग ही रामलीला के विभिन्न पत्रों को निभाने के अलावा जेनरेटर, साउंड, टेंट चौकी और कुर्सी आदि भी लगाते हैं। कमेटी में दीपू मिश्रा मालिक हैं। बाकी सभी कलाकार मासिक तनख्वाह पर हैं। छुट्टी लेने पर तनख्वाह कटती है। हर साल जन्माष्टमी से लेकर जेठ की पूर्णिमा तक रामलीला का मंचन होता है। इस दौरान यदि यज्ञ में रामलीला के मंचन का ऑफर मिलता है तो अच्छी कमाई हो जाती है।

रामलीला कमेटी के संचालक और भगवान राम का चरित्र निभाने वाले दीपू मिश्रा बताते हैं कि पहले दरभंगा में खूब रामलीला कमेटियां थीं। अब बमुश्किल पांच-छह ही बची हैं। रामलीला से कलाकारों के मोहभंग के पीछे के कारणों के बारे में दीपू मिश्र ने बताया कि पहले लोग रामलीला देखने के लिए इच्छुक रहते थे। अब मोबाइल व टीवी के चलते लोगों का रुझान कम हो गया है। इससे थोड़ी दिक्कत आई है। हालांकि, हम इसे धार्मिक कार्य मानते हुए पीछे नहीं हटने वाले।

रामलीला में रावण के पात्र को निभाने वाले रमाकांत ठाकुर ने कहा कि जीवन में अब तक रावण का किरदार निभाने के अलावा दूसरा काम नहीं किया। अब इसे छोड़ने का मन भी करता है तो सोचते हैं कि कोई दूसरा काम नहीं कर पाएंगे।

कभी योगी आदित्यनाथ ने पखारे थे पांव

दरभंगा से आयी रामलीला कमेटी में हनुमानजी का पात्र चरितार्थ करने वाले संजीत झा बताते हैं कि दस साल पहले गोरखपुर में रामलीला के मंचन के दौरान वर्तमान में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने हाथों से मिठाई खिलाया था। साथ ही उन्होंने मेरे चरण पखारे थे। इतनी श्रद्धा आज भी दर्शकों में देखने को मिलती है। भले ही दर्शकों की संख्या कम हो गई है। योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में लग रहा है कि फिर से रामराज का दौर वापस आएगा।

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