पनवेल : नम्रता तालकोक्कुला ने नगर निगम संपत्ति कर के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इस याचिका पर बुधवार को हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति एस.बी. शुक्रे और न्यायमूर्ति आर.एन लड्डा की पीठ के समक्ष सुनवाई हुई। इस दौरान अदालत ने याचिका खारिज करने का फैसला सुनाया।
नम्रता तालकोक्कुला ने पनवेल नगर निगम क्षेत्र में संपत्ति कर लगाने पर आपत्ति जताते हुए उच्च न्यायालय, मुंबई में नगरपालिका संपत्ति कर के खिलाफ एक रिट याचिका दायर की थी। इस याचिका में नगर निगम की ओर से वरिष्ठ विधि विशेषज्ञ एडवोकेट आशुतोष कुंभकोणी के साथ एडवोकेट केदार दिघे ने विधि विशेषज्ञ के रूप में कार्य किया। कोर्ट में इस संबंध में समय-समय पर सुनवाई होती रही। 7 जून को उच्च न्यायालय ने इस संबंध में दोनों पक्षों के पक्षों को सुनने के बाद फैसला सुनाया कि नम्रता तलाकोक्कुला की याचिका को कानून या तथ्यों पर कायम नहीं रखा जा सकता है और उक्त याचिका को अदालत ने खारिज करने का फैसला सुनाया।
संपत्ति कर की अदायगी न करने पर दो प्रतिशत प्रतिमाह की दर से संपत्ति कर जुर्माना बढ़ाए जाने से नागरिकों में संपत्ति कर जमा करने की प्रवृत्ति बढ़ रही है। गत एक अप्रैल से 31 मई तक करीब 40 हजार संपत्तिकर मालिकों ने रिकॉर्ड 105 करोड़ रुपये का भुगतान किया है।
नगर निगम का संपत्ति कर शहर के विकास कार्यों के लिए होने के कारण संपत्ति कर देना अनिवार्य है। आयुक्त गणेश देशमुख ने नगर निगम क्षेत्र के नागरिकों से अपील की है कि वे अपना संपत्ति कर अदा कर शहर के विकास में अपना योगदान दें।


