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Chandigarh : सरकार सूरजमुखी के भावांतर को बढ़ाने पर कर रही विचार:दलाल

कृषि विभाग के अधिकारी जल्द देंगे मार्केट रिपोर्ट

किसानों के हित में लिया हैफेड से खरीद का फैसला

चंडीगढ़ : हरियाणा के कृषि मंत्री जेपी दलाल ने कहा है कि प्रदेश सरकार सूरजमुखी को भावांतर भरपाई के दाम को बढ़ाने पर गंभीरता से विचार कर रही है। इस दिशा में काम किया जा रहा है। इसके बावजूद कुछ स्वयंभू किसान नेता प्रदेश का माहौल खराब कर रहे हैं।

बुधवार को चंडीगढ़ स्थित अपने कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत में दलाल ने कहा कि कुछ स्वयंभू किसान नेताओं ने अपने साथियों को गुमराह करके मंगलवार को चंडीगढ़-दिल्ली मार्ग पर जाम लगा दिया, जिसमें हजारों लोग परेशान हुए।

इसके बाद हाई कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिए कि तुरंत सड़क खाली करवाकर रिपोर्ट दी जाए। रात के समय पुलिस प्रशासन ने आंदोलन कर रहे किसानों को सड़क खाली करने के लिए बकायदा एक घंटे का समय भी दिया। इसके बावजूद वह सड़क से नहीं हटे तो पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल करके सड़क को खाली करवाया। किसानों द्वारा जाम लगाए जाने के कारण हजारों लोग परेशान होते रहे।

दलाल ने कहा कि उत्तर भारत में इस समय कोई भी राज्य ऐसा नहीं है जो सूरजमुखी की खरीद एमएसपी पर कर रहा है। प्रदेश में करीब 80 लाख एकड़ जमीन में खेती होती है। जिसमें से 50 हजार एकड़ में सूरजमुखी को तीसरी फसल के रूप में पैदा किया जाता है। सरकार ने सूरजमुखी का एमएसपी 6400 रुपये घोषित किया है।

कृषि मंत्री ने स्वीकार किया कि मंडियों में किसानों को सूरजमुखी का एमएसपी नहीं मिल रहा है। मंडियों की स्थिति को देखते हुए सरकार ने अपनी एजेंसी हैफेड को सूरजमुखी की खरीद के लिए मार्केट में उतारा। हैफेड ने पहले 4600 फिर 4700 और अब 4800 रुपये की दर से सूरजमुखी की खरीद की। उन्होंने कहा कि किसानों की मांग को देखते हुए सरकार ने एक हजार रुपये प्रति क्विंटल की दर से डीबीटी के माध्यम से भावांतर भरपाई का पैसा देने का फैसला किया। इसके बावजूद अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए गए थे कि वह मार्केट की एक रिपोर्ट तैयार करें। इसके आधार पर किसानों को मिल रहे पैसे तथा एमएसपी के बीच के अंतर का आंकलन करके सूरजमुखी को भावांतर भरपाई के दायरे में लाया जाए। कृषि विभाग के अधिकारियों की टीम इस दिशा में काम कर रही है। इसके बाजूवद कुछ स्वंयभू किसान नेताओं ने अपने हितों को साधते हुए किसानों को भड़काकर प्रदेश का माहौल खराब करने का प्रयास किया।

किसानों के मुद्दे पर विपक्ष को आड़े हाथों लेते हुए कृषि मंत्री ने कहा कि वह बताएं कि उनकी सरकार के कार्यकाल के दौरान कितनी फसलों की खरीद एमएसपी पर हुई है और कितनी फसलों की भावांतर भरपाई हुई है।

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