धरती को हरा-भरा बनाने के लिए किया इतना काम की बन गए ‘ग्रीन गुरु’
ग्रीन गुरु अब तक लगा चुके 2898 से ज्यादा पौधे
मीरजापुर : दुनिया भर के देश विश्व को ग्रीन हाउस गैसों के दुष्प्रभाव से मुक्त करने में लगे हैं। भारत ने भी इंसानी कारगुजारियों से प्रदूषित पर्यावरण को विभिन्न आधुनिक तकनीकों व तौर-तरीकों के जरिए शुद्ध करने का बीड़ा उठाया है। वहीं विंध्य क्षेत्र के ग्रीन गुरु भी पिछले कई वर्षों से पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रहे हैं। पर्यावरण संरक्षण मुहिम से निश्चित ही धरा को हरा-भरा व प्रदूषण मुक्त बनाने में कामयाब होंगे। धरती सजी रहे वृक्ष से,पेड़ों की फैली छांव हो… इसी तरह के संदेश के साथ पर्यावरण संरक्षण में आज ग्रीन गुरु ने पहचान बना ली है।
पर्यावरण को बेहतर बनाने पौधारोपण तो सभी करते हैं लेकिन प्रकृति की सेवा वह भी पौधरोपण जैसे कार्य से हर दिन शायद ही कोई करता हो। वह भी इस जज्बे से कि अपने गांव, पड़ोस के अलावा दूसरे गांवों में भी पौधा लगे, वह भी उस स्थान पर जहां पौधे की पूरी सुरक्षा हो सके। प्रकृति की सेवा का कुछ ऐसा ही जुनून मीरजापुर के शिक्षक (ग्रीन गुरु) अनिल सिंह का है।
मीरजापुर शहर के जेपीपुरम कालोनी निवासी अनिल सिंह के लिए हर दिन पर्यावरण दिवस है। धरा को हरा-भरा बनाने के लिए उन्होंने पूरा जीवन समर्पित कर दिया है। पेड़ों के प्रति लगाव ने उन्हें इतना मशहूर किया कि लोग उन्हें ‘ग्रीन गुरु’ के नाम से बुलाते हैं। उनका लक्ष्य हर दिन एक पौध लगाने का होता है।
पौधारोपण बना दिनचर्या का हिस्सा
पेशे से शिक्षक लेकिन मन, विचार और कर्म से पर्यावरण प्रहरी बन चुके अनिल कुमार सिंह अब तक करीब तीन हजार पौधे लगा चुके हैं। मड़िहान तहसील क्षेत्र के पचोखरा स्थित शांति निकेतन इंटर काॅलेज के अध्यापक अनिल सिंह अपने घर पर ही नर्सरी बनाई है और वर्ष 2015 से हर दिन एक पौधा लगा रहे हैं। ग्रीन गुरु के दिन की शुरुआत हर रोज एक पौध रोपने से होती है। वह हमेशा घर से बाहर निकलते समय पौधों को साथ ले जाना नहीं भूलते। उनका यह संकल्प भी है कि जब तक जीवन है वह हर दिन एक पौधा लगाते रहेंगे।
इन क्षेत्रों में भी पौधे लगा चुके हैं ग्रीन गुरु
ग्रीन गुरु कहते हैं कि पिछली पीढ़ी ने पर्यावरण को लेकर जो प्रयास किया था, वह आज हमारे दौर में है। अगर आज हम प्रयास नहीं करेंगे तो आने वाली पीढ़ी को हरियाली और बेहतर जीवन कहां से देंगे, इसीलिए पर्यावरण के प्रति प्रेरित करने के लिए दूसरों से भी पौधे लगवाते हैं। ग्रीन गुरु मीरजापुर के साथ सोनभद्र, भदोही, गोरखपुर, वाराणसी, मुरादाबाद, इलाहाबाद, कानपुर, चित्रकूट के अलावा अन्य प्रदेश जैसे दिल्ली, महाराष्ट्र, उड़ीसा के विभिन्न स्थानों पर पौधे रोप चुके हैं।
घर पर ही बनाया नर्सरी, खुद तैयार करते हैं पौधे
ग्रीन गुरु के दिन की शुरुआत हर रोज एक पौध रोपने से होती है। वह हमेशा घर से बाहर निकलते समय पौधों को साथ ले जाना नहीं भूलते। इतना ही नहीं, विद्यालय पढ़ाने जाते समय भी पौधे अपने साथ ले जाते हैं। खाली जमीन पर उस पौधे को रोप देते हैं। हर रोज पौधे लगाने के लिए पहले वह नर्सरी से पौधे लाते थे। मगर समय के साथ पौधों की लागत बढ़ी तो वह खुद ही घर में पौधे तैयार करने लगे। अब इनका घर ही नर्सरी का स्वरूप है। पौधरोपण के साथ वे लोगों के बीच नि:शुल्क पौधे बांटते भी हैं।
न हौसला हारा, न निराश हुए, अकेले शुरु किया हरियाली का सफर
अकेले हरियाली का सफर शुरू करने वाले ग्रीन गुरु ने न हौसला हारा, न निराश हुए। यही वजह है कि उनका यह अभियान आज तक जारी है। आज ऐसे ही लोगों की जरूरत है, जो पर्यावरण को बचा सकते हैं। पर्यावरण के प्रति उनकी लगन देख मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ग्रीन गुरु को सम्मानित कर चुके हैं। अब तक कई संगठन की ओर से उन्हें सम्मानित किया जा चुका है।


