जम्मू : ऑल जम्मू पेरेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अमित कपूर ने स्कूल शिक्षा विभाग के निदेशक और जम्मू कश्मीर फीस फिक्सेशन कमेटी (जेकेएफएफसी) के चेयरमैन को अल्टीमेटम दिया है कि अगर उन्होंने एक सप्ताह के अन्दर उनकी मांगों को पूरा नहीं किया और अभिभावकों से लूटमार करने वाले नीजि स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की तो वह उनका घेराब करेंगें।
कटड़ा में एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान बोलते हुए अमित कपूर ने मंगलवार को यह बात कही। उन्होंने कहा कि अपनी मांगों को मनवाने के लिए उनका संघर्ष लगातार जारी है। इससे पहले उन्होंने नीजि स्कूलों में मची हुई लूट के खिलाफ तीन दिवसीय धरना-प्रदर्शन किया था। जिसमें कई सामाजिक, साहित्यक, गैर सरकारी संस्थाओं और अन्य राजनीतिक नेताओं ने भाग लिया था। उन्होंने जनहित के इस मुद्दे को लेकर भाजपा सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं द्वारा चुप्पी साधे रखने के लिए उनको आड़े हाथों लिया। वहीं उन्होंने सीईओ रियासी और जेडईओ को भी नीजि स्कूलों की लगाम कसने में नाकाम रहने के लिए आड़े हाथों। लिया।
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगों को एक सप्ताह के भीतर पूरा नहीं किया तो वह शिक्षा विभाग के निदेशक और जेकेएफएफसी के चेयरमैन का घेराब करेंगे। उन्होंने लोगों और अपने समर्थकों से आह्नान किया कि वे एक बड़े आंदोलन के लिए तैयार रहें। अमित कपूर ने कहा कि वह कुंभकरण की नींद में सोए हुए प्रशासन को जगाने के लिए कोई कसर बाकि नहीं छोड़ेगें। उन्होंने उपराज्यपाल से कहा कि अगर वह नीजि स्कूलों के माफिया को खत्म करने के प्रति गंभीर हैं तो उनको 5 मिनट मिलने का समय दें और आपको सभी सबूत दिए जायेगें। उन्होंने कहा कि वह नीजि स्कूलों की लूट के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए विभिन्न क्षेत्रों के दौरे करेगें और जागरूकता अभियान चलायेगें। इसके बाद बिशनाह क्षेत्र का भी दौरा किया जायेगा।
उनकी मांगों में प्रमुख जेकेएफएफसी की ओर से तय की गई फीस से अधिक बसूली गई फीस को तत्काल रिफंड किया जाये और इसके लिए तुरंत आदेश जारी किया जाये। नीजि स्कूलों की चलने वाली बसों का किराया भी यात्री वाहनों की तरह किलोमीटर के हिसाब से तय किया जाए।
शिक्षा का अधिकार अधिनियम की नीति वर्ष 2020 से लागू हुई है लेकिन जम्मू कश्मीर में इसे अभी तक लागू नहीं किया गया है। इसके बारे में स्पष्ट किया जाये कि इस नीति के तहत अभी तक कितने स्कूलों ने गरीब बच्चों को मुफ्त में शिक्षा दी है। वहीं विभाग द्वारा गठित टीमों को ठोस सबूत देने के बावजूद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई है। इन टीमों के स्थान पर टास्क फोर्स का गठन किया जाना चाहिए और उसमें उन लोगों को शामिल किया जाए जिनको इस मामले में अच्छी तरह से जानकारी हो।
जो नीजि स्कूल एनसीईआरटी या बोर्ड की किताबें नहीं लगा रहे हैं उनके खिलाफ कार्रवाई हो और जिन बच्चों ने अधिक किताबें ली हैं उनकी किताबें वापस ली जायें। जिन स्कूलों ने मनमाने ढंग से किताबें लगाई हैं उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं बर्दियांे को भी पांच साल के बाद ही बदला जाना चाहिए और किताबों तथा बर्दियों को विशेष दुकानों पर या स्कूल की अपनी दुकानों पर नहीं बेचा जाना चाहिए। किसी भी स्कूल को दो बर्दियों से अधिक लगाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए और बर्दी केवल पांच साल के बाद ही बदली जानी चाहिए।
नीजि स्कूलों द्वारा जेकेएफएफसी द्वारा तय की गई फीसों से अधिक बसूली करने, या अधिक फीसें लेने या मनमाने ढंग से किताबें लगाने वाले स्कूलों को सीज किया जाना चाहिए। नीजि स्कूलों के शिक्षकों को दिये जाने वाले वेतन को भी सार्वजनिक किया जाना चाहिए ताकि इन शिक्षकों के साथ हो रहे भेदभाव को समाप्त किया जाये। उन्होंने आरोप लगाया कि नीजि स्कूल शिक्षकों का पीएफ भी नहीं काटते हैं और अधिकांश स्कूल शिक्षकों को एक साल के बाद निकाल देते हैं ताकि उनका पीएफ नहीं काटना पड़े।


