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Begusarai: दर्शकों को भाव विह्वल कर गया ”रश्मिरथी” का कर्ण-कुंती संवाद

बेगूसराय: (Begusarai) राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर (Rashtrakavi Ramdhari Singh Dinkar) की 49वीं पुण्यतिथि के अवसर पर बीते रात उनके पैतृक गांव सिमरिया में दिनकर के महाकाव्य ‘रश्मिरथी’ के भावों को अभिनय में पिरोकर नाट्य मंचन किया गया।

कार्यक्रम का आयोजन आशीर्वाद रंगमंडल द्वारा प्रथम आशीर्वाद मासिक नाट्य श्रृंखला के चतुर्थ माह में दिनकर पुस्तकालय के सभागार में किया गया था। प्रयास पटना के कलाकारों द्वारा मिथलेश सिंह के निर्देशन में मंचित नाटक में महाभारत के यशस्वी पात्र दानवीर कर्ण और कुंती के मर्मस्पर्शी संवाद लोगों के मन को छू गया। सातों सर्ग के अविस्मरणीय मंचन ने दर्शकों को एक घंटा 50 मिनट तक अपने अभिनय से बांधे रखा।

कर्ण की भूमिका में दीपक आनंद ने दर्शकों को भाव विह्वल कर दिया। नाटक को देख कर दर्शक सारे पात्रों को जीवंत अपने सामने महसूस कर रहे थे। कर्ण-कुंती संवाद ने लोगो को रुला दिया। सूर्य की आराधना से पुत्र को जन्म देने के बाद कुंती उसे एक पेटी में बंद कर नदी में बहा देती है।

उसका यही पुत्र कर्ण जैसे यशस्वी नायक के रूप में महाभारत में प्रसिद्ध हुआ। कर्ण संवाद करता है ”मैं उनका आदर्श कहीं जो व्यथा न खोल सकेंगे, पूछेगा जग किंतु पिता का नाम न बोल सकेंगे। जिनका निखिल विश्व में कोई कहीं न अपना होगा, मन में लिए उमंग जिन्हें चिरकाल कल्पना होगा। कर्ण चरित्र के उद्धार की चिंता प्रसंगों में कई बार मुखरित हुई।

इससे पूर्व कार्यक्रम का उद्घाटन राष्ट्रकवि दिनकर के पौत्र अरविंद कुमार सिंह ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। आगत अतिथियों का स्वागत अमित रौशन ने पर्यावरण संरक्षण के लिए पौधा भेंट कर किया।

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