उदयपुर : उदयपुर के मावली में 29 मार्च को आठ साल की बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के आरोपित कमलेश के खिलाफ पुलिस ने 306 पेज की चार्जशीट पेश की है। सामने आया है कि कमलेश ने बच्ची से दुष्कर्म और हत्या करने के पहले तीस बार अश्लील फिल्म देखी थी। इसके बाद बच्ची को घर में बुलाकर कमलेश ने तब तक दुष्कर्म किया, जब तक उसकी मौत नहीं हो गई। मौत के बाद उसने छुरी से मासूम की लाश के दस टुकडे़ किए और थैलियों में भरकर बाथरूम में छिपा दिए। जब आरोपित के माता-पिता को इस घटना का पता चला, तो उन्होंने लाश ठिकाने लगाने में बेटे की मदद की।
सोमवार को कोर्ट में पेश की गई चार्जशीट में 48 गवाहों के नाम हैं। तीनों आरोपितों को सोमवार दोपहर एक बजे कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने इन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
गौरतलब है कि उदयपुर के मावली के लोपड़ा गांव से 29 मार्च को आठ साल की बच्ची लापता हो गई थी। परिवार ने बच्ची की गुमशुदगी की रिपोर्ट मावली थाने में दर्ज कराई थी। एक अप्रैल को पुलिस को बच्ची का शव मिला और उसी दिन आरोपित कमलेश को भी गिरफ्तार कर लिया गया था।
पूछताछ में सामने आया कि बच्ची अपने घर से खेत जा रही थी। आरोपित कमलेश घर में अकेला था और खिड़की पर बैठकर मोबाइल पर पोर्न मूवी देख रहा था। बच्ची को जाता देख, उसने आवाज देकर अंदर बुलाया। फिर उसे बाथरूम में ले गया।
कमलेश की हरकतों से बच्ची चिल्लाने लगी तो उसके मुंह में कपड़ा ठूंस दिया। बच्ची के साथ दरिंदगी के बाद वह उसे उठाने लगा, लेकिन बच्ची निढाल पड़ी थी। कमलेश समझ गया कि बच्ची की मौत हो चुकी है।
चार्जशीट के मुताबिक कमलेश ने बाथरूम में ही पत्थर-छुरी से बच्ची के दस टुकड़े किए। फिर उन टुकड़ों को अलग-अलग थैली में भरा और इन थैलियों को टॉयलेट में छिपा दिया। कमलेश के माता-पिता को घटना की खबर दूसरे दिन 30 मार्च को लगी। तीनों ने मिलकर शव को ठिकाने लगाने का प्लान बनाया।
रात करीब 11 बजे कमलेश शव के टुकड़ों से भरी बोरी घर से करीब 200 मीटर दूर बने खंडहर में फेंकने गया। इस बीच कमलेश का पिता राम सिंह घर के बाहर और मां किशन कंवर खंडहर के बाहर खड़ी रही, ताकि आने-जाने वालों से बेटे को सतर्क कर सकें।
कमलेश इतना शातिर था कि वह तीन दिन तक पुलिस और ग्रामीणों के साथ मिलकर बच्ची के शव को तलाशने का नाटक करता रहा। पुलिस के जासूसी डॉग की मदद से वह एक अप्रैल को पकड़ा ही गया।
कमलेश का परिवार खेती पर निर्भर है। कमलेश नवीं तक पढ़ा है, लेकिन फेल होने के बाद उसने पढ़ाई छोड़ दी थी। करीब दो साल पहले चचेरे भाई के साथ कमलेश मुंबई भी गया था। वहां काम में उसका मन नहीं लगा तो छह महीने में ही गांव लौट आया था।


