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Motihari : पूर्वी चंपारण जिले में पांच दिन तक पड़ेगी भीषण गर्मी

मोतिहारी: (Motihari) अगले पांच दिनो तक पूरा जिला भीषण गर्मी के चपेट में रहेगा।इसका पूर्वानुमान पिपरा कोठी कृषि विज्ञान केन्द्र ने बुधवार को जारी किया है।मौसम वैज्ञानिक नेहा पारीक ने बताया है,कि इस अवधि में जिले में अगले 2 दिन आसमान साफ रहेंग। वहीं दो दिन बाद बादल छाये रह सकते है। हांलाकि मौसम के शुष्क बने रहने के अनुमान से इस अवधि में अधिकतम तापमान 40 से 42 डिग्री सेल्सियस व न्यूनतम तापमान 22 से 24 डिग्री सेल्सियस के आस-पास रहने का अनुमान है।जिससे लू की स्थिति बन सकती है।

इस अवधि में 12-16 किमी प्रति घंटे की गति से पछिया हवा चलने की संभावना है।वही पिपरा कोठी कृषि विज्ञान केन्द्र के प्रमुख वैज्ञानिक डा.अरविन्द सिंह ने किसानों के लिए एडवाइजरी जारी करते कहा है,कि मौसम के शुष्क रहने की संभावना को देखते हुए तैयार गेहूं, अरहर एवं मक्का फसल की कटनी तथा दौनी पूरी कर दानों को धूप में सूखाने के बाद भंडारण करें।साथ ही इस अवधि में विभिन्न फसलों की रक्षा को लेकर भी सलाह जारी किया है।

मक्का

बसंतकालीन मक्का की फसल पर मिट्टी चढ़ाने का कार्य करें। आवश्यक नमी हेतु सिंचाई करें। इन फसलों में तना छेदक कीट के रोक-थाम हेतु क्लोरपाईरिफॉस 20 ईसी दवा का 2.5 मिली/लीटर पानी की दर से घोल बनाकर समान रूप से छिड़काव करें।

मूंग और उड़द

मूंग और उड़द की बुवाई जल्द से जल्द पूरी करें। विगत माह में बोयी गई मूंग व उरद् की फसलों में निकाई-गुराई एवं बछनी करें। इन फसलों में सघन रोमोवाली सुंडिया का प्रभाव हो सकता है।इस कीट से फसल को काफी नुकसान एवं उपज में काफी कमी आती है।ऐसे इसके प्रभाव को देखते हुए फसल में मिथाइल पैराथियान 50 ईसी दवा का 2 मिली/लीटर या क्लोरपाईरिफाॅस 20 ई0सी0 दवा का 2.5 मि0ली0/लीटर पानी की दर से घोल बनाकर फसल में छिडकाव करें।

आम

आम के पेड़ में मिलीबग (दहिया कीट) की निगरानी करें। यह कीट चिपटे गोल आकार के पंखहीन तथा शरीर पर सफेद दही के रंग का पाउडर चिपका रहता है। यह आम के पेड़ में मुलायम डालों और मंजर वाले भाग में बहुत की संख्या में चिपका हुआ देखा जा सकता है तथा यह उन हिस्सों से लागातार रस चुसता रहता है जिससे आक्रांत भाग सुख जाते है।इसके राकथाम हेतु डाइमेथाएट 30 ईसीदवा का 1.0 मिली/लीटर पानी की दर से घोल बनाकर पेड़ पर समान रूप से छिडकाव करें।आम के बगीचों में नमी बनाये रखें।

लीची

लीची के पेड़ में फल बेधक कीट के शिशु जो उजले रंग के होते हैं। यह फलों के डंठल के पास से फलो में प्रवेश कर गुट्टे को खाते हैं फल नष्ट होता है।इससे बचाव हेतु लीची के पत्तियों एवं टहनियों पर प्रोफेनोफास 50 इ०सी० का 10 मि0ली0 या कार्बारिल 50 प्रतिशत घुलनशील पावेंडर का 20 ग्राम दवा को 10 लीटर पानी में घोलकर अप्रैल माह में 15 दिनों के अन्तराल पर प्रति पेड़ की दर से दो छिड़काव करें।बाग में नमी बनाये रखें।

टमाटरअत्यधिक गर्मी से घुलनशील

फलो को इकठा कर नष्ट कर दें, इससे कीट पनपने की संभावना अधिक होती है।कीड़े का प्रभाव हो तो स्पिनोसेड 48 इसी/1 मिली0 प्रति 4 लीटर पानी की दर से छिड़काव करे।

भिण्डी

भिण्डी की फसल में लीफ हॉपर कीट की निगरानी करे। यह कीट दिखने में सूक्ष्म होता है। इसके नवजात एवं व्यस्क दोनो पत्तियों पर चिपककर रस चुसते है। पत्तियां पीली तथा पौधे कमजोर हो जाते हैं।इसका प्रकोप दिखाई देने पर इमिडाक्लोप्रिड 0.5 मिली प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर छिड़काव करें।

गरमा सब्जियां

गरमा सब्जियों जैसे भिन्डी, नेनुआ, करेला, लौकी (कद्दू), और खीरा की फसल में आवश्यकतानुसार निकाई-गुड़ाई एवं सिंचाई करें। सब्जियों में कीट एवं राग-व्याधि की निगरानी प्राथमिकता से करते रहें। कीट का प्रकोप इन फसलों में दिखने पर मैलाथियान 50 ईसी या डाइमेथोएट 30 ईसी दवा का 1 मिली प्रति लीटर पानी की दर से घोलकर छिड़काव करें।

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