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Mandi : सौ साल के बुजुर्ग ने स्कूल में कापियां बांटी- संस्मरण सुनाए

मंडी : मंडी के राजकीय बिजै सीनियर सेकेंडरी स्कूल बॉयज में सोमवार को इतिहास रचा गया। वर्ष 1979 में इंजीनियर यदुनंदन मल्होत्रा ने जन सेवा हेतु दीन सहायक ट्रस्ट बनाया था जिसके तत्वाधान में आज इसके ट्रस्टी क्रमश: स्वतंत्रता सेनानी ओम चंद्र कपूर बाबूजी , ज्योति प्रकाश मल्होत्रा, तेजिंदर वैद्य, प्रबंधक सरदार गुरबख्श सिंह ने स्कूल में जाकर 6 सरकारी स्कूलों के आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों के लिए कापियां वितरित की जो स्कूलों के प्रतिनिधि अध्यापकों ने स्वंय आकर के प्राप्त की व बच्चों ने भी कापियां प्राप्त होने पर हर्ष व्यक्त किया।

ज्ञात रहे कि आज से ही वर्ष 2023-24 के शैक्षणिक सत्र की पढ़ाई भी प्रारंभ हुई है। कॉपियों का वितरण जीपीएस पड्डल, जीएमएस पुरानी मंडी, जीपीएस समखेतर, जीपीएस भगवाहन, जीपीएस यू ब्लॉक व राजकीय बीजै सीनियर सेकेंडरी स्कूल के विद्यार्थियों में मुख्य अतिथि व बाबू ओम चंद जी द्वारा किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता ऊर्जावान युवा एसडीएम मंडी रितिका जिंदल ने की। स्कूल के बच्चे इस गौरवमय आयोजन के गवाह बने जिसमें सारा स्टाफ भी उपस्थित था। सर्वप्रथम मुख्य अतिथि व ट्रस्ट के सम्मानीय सदस्यों को स्कूल की प्रिंसिपल जैश्री कपूर व स्टाफ ने पुष्प भेंट कर उनका स्वागत किया और स्कूल के सबसे होनहार बच्चे ने बाबू ओम चंद जी को स्कूल का सबसे पुराना छात्र होने के नाते उनको हार डाल कर सम्मानित किया। शायद हिमाचल में प्रथम अवसर होगा जिसमें 100 साल की उम्र पार कर चुके किसी कर्मठ बुजुर्ग ने स्वस्थ अवस्था में अपने स्कूल में जाकर इस तरह से किसी आयोजन में हिस्सा लिया होगा जो कि हम सभी के लिए प्रेरणादायक व अनुकरणीय है।हेमलता पुरी ने मंच का सफल संचालन करते हुए ट्रस्ट की पृष्ठभूमि बताई वह कार्यक्रम के प्रयोजन के बारे में विस्तार से बताया।

इस अवसर पर ट्रस्ट के चेयरमैन हंस राज मल्होत्रा अस्वस्थ होने के कारण स्वयं उपस्थित नहीं हो सके। ट्रस्ट की ओर से कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉक्टर सतीश मल्होत्रा, अजय सहगल, प्रधान ओल्ड स्टूडेंटस एसोसिएशन अनिल शर्मा छुच्छू ,विनोद बहल व उनके मित्रों पुष्पराज टंडन , रोशन लाल कपूर व डॉ.पवन वैद्य का विशेष योगदान रहा। बाबू ओम चंद जी ने राजा जोगिंदर सिंह के राज काल में वर्ष 1928-29 में बिजै हाई स्कूल में प्रथम कक्षा में प्रवेश लिया था और दसवीं यहीं से पास की थी।इन्होंने अपना 100वां जन्मदिन धूमधाम से इसी वर्ष 24 फरवरी को मनाया। और अभी भी वह ट्रस्ट के कार्य को कर्मठता से व नियमित रूप से कार्यालय में आकर करते हैं। आज के कार्यक्रम की विशेषता यह रही कि स्कूल के चार होनहार बच्चों ने बुजुर्ग अतिथि बाबू ओम चंद जी से कुछ प्रश्न पूछे।प्रश्न बहुत ही दिलचस्प थे जैसे कि उनको क्या उस समय पॉकेट मनी मिलती थी?क्या स्कूल में मार पड़ती थी? क्या उनका बस्ता हमारी तरह तब भी भारी होता था? बाबूजी ने विस्तार से प्रश्नों के उत्तर देते हुए बताया कि उन्हें स्कूल में वर्ष 1928 से 1938 के अंतराल में कभी-कभी दो आने की पॉकेट मनी मिला करती थी तथा पढ़ाई में लापरवाही करने व काम ना करने के लिए कभी-कभी मास्टरजी की मार भी खानी पड़ती थी।

अलबत्ता बस्ता आज की तरह तब भारी नहीं हुआ करता था और पढ़ाई उर्दू में होती थी केवल एक दो किताबें लेकर ही जाते थे। लेकिन बच्चे बहुत ही तन्मयता से पढ़ाई करते थे और अध्यापकों का बहुत रोब व आदर हुआ करता था।उनका तरीका पढ़ाने का बहुत ही खास व विशेष होने के कारण आज तक याद आता है। प्रश्नों के दिलचस्प उत्तर सुनकर बच्चों ने बार-बार तालियां बजाकर अपनी भावनाओं को प्रकट किया।इस अवसर पर स्कूल की प्रिंसिपल जैश्री कपूर ने उपस्थित सम्माननीय बुजुर्गों व प्रबुद्ध जनों का आना स्वयं में ही गौरव की बात थी और उनकी उपस्थिति स्कूल के स्टाफ व बच्चों को आशीर्वाद देने व सम्मानित करने जैसा था जोकि हमेशा याद रहेगा। अंत में सेवानिवृत्त सेशन जज ट्रस्टी तेजिंदर वैद्य ने स्कूल के प्रिंसिपल,स्टाफ व बच्चों का विशेष आभार प्रकट करते हुए बताया कि अगले वर्ष कॉपियों के वितरण का कार्यक्रम इससे भी भव्य और बड़े स्तर पर किया जाएगा ताकि कोई भी आर्थिक रूप से कमजोर बच्चा साधना के अभाव में अपनी पढ़ाई में पीछे ना रह जाए और उसे कदम कदम पर सहायता दी जाती रहेगी। आज का यह सफल कार्यक्रम बच्चों के दिलों में अपना स्थान बना गया इसमें कोई संदेह नहीं है।

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