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Gumla : गुमला जिले के लिए रागी मिशन बना वरदान

गुमला : गुमला जिले में हुए उत्कृष्ट कार्यों के चलते पूरे देश के आकांक्षी जिलों में इस जिले ने अव्वल स्थान हासिल किया। इसके लिए जिले को इस कोटि में पीएम अवार्ड मिलने जा रहा है। उपायुक्त सुशांत गौरव के जिन प्रयासों ने जिले को श्रेष्ठ प्रशासनिक कार्यों की श्रेणी में लाते हुए झारखंड के लिए एक इतिहास रचा। उन कार्यों की सूची में रागी मिशन भी एक है। यद्यपि रागी मिशन केंद्र सरकार की ओर से पूरे देश में संचालित किया जा रहा है, जिसमें मोटे अनाजों के उत्पादन को बढ़ावा देने की पहल की गई। लेकिन उपायुक्त सुशांत गौरव ने इस मिशन को एक नया आयाम दिया और रागी उत्पादकता को जमीनी रूप से बढ़ाया । उन्होंने रागी मिशन से न केवल जिले के किसानों की आर्थिक स्थिति में बदलाव लाने के लिए पहल की, बल्कि रागी मिशन से कुपोषण को भी मात देने की सोंची। इतना ही नहीं इस मिशन से रोजगार के नए मार्ग भी प्रशस्त हुए।

जिले में लगभग 1.23 लाख छोटे एवं सीमांत किसान है जो खेती पर आश्रित है । कम औसत वर्षा वाला यह जिला सूखा प्रवण है । सालों से पारंपरिक खेती की प्रणाली पर आश्रित यहां के किसान सिंचाई के लिए कम पानी की उपलब्धता के कारण साल में केवल एक बार की खेती करते रहे। जिस कारण किसानों की आर्थिक स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं देखने को मिल रहा था, जिसके परिणामस्वरूप यहां के किसान पलायन को चुन रहे थे। सुखाड़ की परिस्थिति से जूझते जिले के लिए रागी मिशन एक वरदान के रूप में सामने आया । उपायुक्त सुशांत गौरव ने इस स्थिति को समझते हुए पूरे जिले में एक अभियान चलाया एवं रागी मिशन से हर घर के किसानों को जोड़ा। रागी एक ऐसी खेती है जिसमें कम पानी की और कम मेहनत की आवश्यकता पड़ती है। इसकी खेती में नुकसान भी कम देखने को मिलता है।

उपायुक्त की पहल से जिले के 5550 महिला किसानों ने रागी मिशन से जुड़ कर 10 हजार स्क्वायर फीट भूमि पर रागी की खेती की । इसमें टाना भगत समुदाय के किसान भी सम्मिलित थे। इस दौरान जिला प्रशासन की ओर से एनएससी से प्रमाणित 20 हजार किलो ग्राम रागी बीज का वितरण किसानों के बीच निःशुल्क किया । इससे 2022-23 में धान की खेती से रागी की खेती में स्थानांतरित हुए। इसके परिणाम स्वरूप पिछले पांच साल के औसत की तुलना में, 2022-2023 में रागी फसल के उत्पादन में 270 फीसदी और शुद्ध बुवाई क्षेत्र में 219 फीसदी की वृद्धि हुई। इसके बाद 17 भंडारण बिंदुओं पर खरीद और सभी महिला एफपीसी द्वारा संचालित रागी प्रसंस्करण केंद्र में रागी की खरीद की गई, जहां रागी का प्रसंस्करण किया गया। यह केंद्र जोहार रागी ब्रांड के तहत रोजाना जेएसएलपीएस की एसएचजी की महिलाओं द्वारा पर्याप्त मात्रा में रागी का आटा, रागी लड्डू के पैकेट और रागी स्नैक्स बनाई गई। इस पूरी प्रक्रिया की जबरदस्त सफलता ने 2023-24 खरीफ सीजन के लिए जिले की व्यापक भागीदारी को प्रेरित किया, जिसमें 26,000 एकड़ से अधिक (दो साल के भीतर रागी के रकबे में 10 गुना से अधिक की वृद्धि ) कृषि भूमि को रागी की खेती के लिए प्रस्तावित किया गया है। यह सब आने वाले कई वर्षों तक रागी मिशन पहल की स्थिरता सुनिश्चित करता है।

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