खूंटी : हरि मंदिर खूंटी में शनिवार की शाम बंग समुदाय ने धूमधाम से बंगला नववर्ष मनाया । कार्यक्रम की शुरुआत रवींद्रनाथ टैगोर की कविता एशो हे वैशाख एशो गीत के बाद केक काटकर की गई। कार्यक्रम में बंग परिवार की महिलाओं द्वारा रंगारंग कार्यक्रम किया गया और बच्चों द्वारा डांस की प्रस्तुति दी गई।
इस संबंध में सैकत कुमार दास ने बताया कि यह बंगला की 1430वां नववर्ष है। इसकी शुरुआत मुग़ल बादशाह अक़बर के ज़माने में हुई थी। बंगाल में किसानों से कर वसूली की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए बंगाबघ की शुरुआत की थी। इसका मतलब था की चौत के अंतिम दिन पुराना हिसाब-किताब चुकता कर देना है और बैसाख के पहले दिन से नया बही-खाता जिसे बंग समुदाय में हाल खाता कहा जाता है, शुरू होगा।, कर वसूली की प्रक्रिया को सरल करने के लिए उठाए गए इस क़दम से ही बंगाबघ की शुरुआत हुई। कार्यक्रम को सफल बनाने में अरिंदम दास, अनिर्बन दास, देवाशीष दास, रंजन दास, अंजन दास के अलावा बंग समुदाय के सदस्यों ने योगदान दिया।


