
गेंदा सहित अन्य फूलों का हो रहा उत्पादन
मां कर्मा स्वसहायता समूह की महिलाएं कर रही फूलों का उत्पादन
धमतरी : कुरुद ब्लाॅक के ग्राम पचपेड़ी में महिला समूह गेंदा फूल, रजनीगंधा, ग्लेडियोलसफूल की खेतीं कर आत्मनिर्भर हो रही है। शासन की योजनाओं का लाभ लेकर महिला समूह अपनी आय बढ़ा रही है।
मां कर्मा स्वसहायता समूह पचपेड़ी की महिलाएं लक्ष्मी साहू, पुष्पा साहू, मीना साहू, अनुसुईया साहू, सेवती साहू, उर्वशी साहू गेंदा फूल की खेती से आत्मनिर्भर बन रही है। शुरुआती दौर में समूह की महिलाएं आर्थिक परेशानियों का सामना कर रहे थे। उन्हें यह समझ में भी नहीं आ रहा था कि जीवन-यापन के लिए कौन सा व्यवसाय शुरू करें। भविष्य के प्रति सजगता भी जरूरी है। इसी बीच राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन अंतर्गत विभिन्न विभागों के अभिसरण जिसमें उद्यानिकी विभाग के द्वारा पुष्प विस्तार योजना के तहत् फूलों की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। फूलों की खेती से अधिक आमदनी अर्जित की जा सकती है। यह जानकारी जनपद पंचायत कुरुद के माध्यम से प्राप्त हुई।
प्रशिक्षण के लिए आपस में रणनीति तैयार की गई तथा संबंधित जानकारी भी एकत्रित की गई। प्रशिक्षण उपरांत समूह की महिलाओं ने फूलों की खेती से कम लागत में भी अधिक मुनाफा हासिल किया। मुख्य कार्यपालन अधिकारी रोक्तिमा यादव ने बताया कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना एवं प्रोजेक्ट उन्नति के तहत् वित्तीय वर्ष 2018- 19 में 100 दिवस कार्य पूर्ण किये गये जाबकार्डधारी परिवार के सदस्य को उनके रूचि के आधार पर प्रशिक्षण प्रदान कर रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर आत्मनिर्भरता के लिए दिया जा रहा है। जिले के कुरूद विकासखंड के ग्राम पंचायत रामपुर में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा स्वसहायता समूह की 30 महिलाओं को पांच दिवसीय निश्शुल्क प्रशिक्षण बड़ौदा स्वरोजगार विकास संस्थान धमतरी देना आरसेटी के माध्यम से दिया गया।
दो माह में 67 किलोग्राम गेंदा फूल का उत्पादन
पचपेड़ी की महिलाओं द्वारा प्रशिक्षण के उपरांत 0.50 एकड़ में गेंदा फूल की खेती, 0.20 एकड़ में रजनीगंधा फूल की खेती, 0.25 एकड़ में ग्लेडियोलस की खेती किया जा रहा है। दो माह पश्चात् 67 किग्रा गेंदा फूल के उत्पादन से लगभग चार हजार रुपये की आमदनी हुई। समूह की महिलाओं की मेहनत रंग आने लगी, आमदनी चाहे जो भी हो आगे बढ़ने का हौसला मिला। अब तक समूह के द्वारा लगभग 12 क्विंटल फूल उत्पादन से लगभग 20 हजार रुपये की आमदनी हुई है। परंपरागत फसलों के बजाय समूह की महिलाओं को फूलों की खेती से आत्मनिर्भरता की राह आसान हुई।


