
नयी दिल्ली: (New Delhi) उच्चतम न्यायालय ने उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें किसान क्रेडिट कार्ड प्रणाली के कामकाज में कथित वित्तीय धोखाधड़ी की अखिल भारतीय स्तर पर जांच की अपील की गई थी।न्यायालय ने कहा कि याचिकाकर्ता के ‘सामान्य आरोपों’ के आधार पर बैंक अधिकारियों की मिलीभगत की जांच संभव नहीं है।न्यायमूर्ति एस के कौल और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार की पीठ ने हालांकि कहा कि याचिकाकर्ता अपनी शिकायतों के साथ भारतीय रिजर्व बैंक से संपर्क कर सकते हैं।
पीठ ने कहा, ‘‘भारत के संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत याचिकाकर्ता द्वारा लगाए गए सामान्य आरोपों पर किसी प्रकार की जांच करना संभव नहीं है और याचिकाकर्ता को मामले पर आगे बढ़ने से पहले इस बारे में पता होना चाहिए क्योंकि वह योग्य वकील हैं और कानून को अच्छी तरह जानते हैं।’’पीठ ने आगे कहा, ‘‘हम इस तरह भारत के संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत अधिकार क्षेत्र का उपयोग नहीं करना चाहते हैं, लेकिन याचिकाकर्ता चाहें तो संबंधित मंत्रालय से संपर्क कर सकते हैं।’’
संविधान का अनुच्छेद 32 संवैधानिक उपायों से संबंधित है, जिसके तहत भारतीय नागरिक अपने मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में अपील कर सकते हैं।शीर्ष अदालत ने इस मामले में न्याय मित्र नियुक्त किए गए वरिष्ठ अधिवक्ता जयंत मेहता की दलीलों को संज्ञान में लिया किया कि धोखाधड़ी की दो घटनाओं को छोड़कर किसान क्रेडिट कार्ड प्रणाली के कामकाज के संबंध में बाकी आरोप सामान्य किस्म के हैं।


