
नयी दिल्ली : घर खरीदारों ने जेपी इन्फ्राटेक के अधिग्रहण और अधूरे फ्लैट का निर्माण पूरा करने पर मंगलवार को आए राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) के आदेश को ‘होली का असली तोहफा’ बताया।
इसके साथ ही घर खरीदारों ने उम्मीद जताई कि जेपी इन्फ्राटेक के अधिग्रहण के लिए सुरक्षा समूह की तरफ से पेश समाधान योजना को स्वीकृति मिलने से अधूरे फ्लैट की आपूर्ति में तेजी आएगी।
जेपी इन्फ्राटेक की नोएडा एवं ग्रेटर नोएडा में स्थित कई आवासीय परियोजनाओं में घर खरीदने करने वाले करीब 20,000 लोगों को कई साल बाद भी घर नहीं मिल पाए हैं। कंपनी के भारी कर्ज में दबने के बाद उसके खिलाफ दिवाला प्रक्रिया शुरू हो गई थी लेकिन अब जाकर उसे एनसीएलटी की मंजूरी मिली है।
एनसीएलटी ने जेपी इन्फ्राटेक लिमिटेड (जेआईएल) के अधिग्रहण के लिए दिवाला समाधान प्रकिया के जरिये लगाई गई सुरक्षा समूह की बोली को मंजूरी दे दी। इस फैसले से लगभग छह साल के बाद 20,000 घर खरीदारों को अपने फ्लैट का कब्जा मिलने की उम्मीद बंधी है।
न्यायाधिकरण ने सुरक्षा समूह के समाधान प्रस्ताव को मंजूरी देने के साथ अधूरे फ्लैटों का काम पूरा करने के लिए एक निगरानी समिति बनाने का भी निर्देश दिया है। यह समिति रोजमर्रा के काम पर नजर रखने के साथ न्यायाधिकरण को मासिक प्रगति रिपोर्ट भी देगी।
जेआईएल रियल एस्टेट अलॉटीज वेल्फेयर सोसाइटी के अध्यक्ष आशीष मोहन गुप्ता ने कहा, ‘एनसीएलटी के इस फैसले से जेपी की परियोजनाओं में घर खरीदने वाले लोग बेहद खुश हैं और यह उनके लिए होली का असली तोहफा है। हम उम्मीद करते हैं कि कंपनी सुरक्षा समाधान योजना में निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार निर्माण शुरू करेगी और घर खरीदारों को अनुमोदित समय के अनुरूप फ्लैट वितरित करेगी।’
उन्होंने यह आशा भी जताई कि इस मामले में आगे कोई मुकदमा नहीं चलेगा ताकि सुरक्षा समूह जल्द-से-जल्द निर्माण कार्य शुरू कर सके।
आईडीबीआई बैंक के नेतृत्व वाले कर्जदाता समूह के आवेदन पर जेपी इन्फ्राटेक के खिलाफ अगस्त, 2017 में दिवाला समाधान प्रक्रिया शुरू हुई थी।


