
मथुरा/वृन्दावन : ये आकाशवाणी मथुरा वृन्दावन है और पिछले कुछ सालों से चल रहा है यहां फेवरेटिस्म का खेल वो भी तानाशाही तरीकों से के हम तो यहां के मुंसिब हैं कर लो जो कर सको रूल्स और रेगुलेशंस को दरकिनार कर अपने अपने फेवरेट को महिला कार्यक्रम से ही उठा कर मनचाहे तरीके से पहले तो अनाउंसर बना दिया गया है। इतना ही नहीं अपने पसंदीदा से एक साथ कई कार्यक्रम करवाये जाते हैं और सबके पेमेंट भी अलग-अलग किये जाते हैं। जबकि ऐसा रूल्स के ख़िलाफ़ है। जो पसन्दीदा है वो तो एक साथ कई कार्यक्रम से पेमेंट ले रहा है जबकि उसके साथ जो सीनियर हैं पहले से कर रहे हैं उन्हें इसकी इजाज़त नही के वो एक साथ और कार्यक्रम कर सकें। अफसरों की तानाशाही और ग़लतियों को नज़रअंदाज़ किया जा रहा है जिस वजह से वो निरंकुश हो चले हैं उन पर जांच करने वाले भी आते हैं तो उनकी पहचान के कार्यस्थल से और वहीं साठगांठ हो जाती है और फिर जारी रहता है ये खेल और वो बात कहीं छुप जाती है जो ये आकाशवाणी मथुरा वृन्दावन कहना चाहता है। यहाँ तक कि जो बहुत ही प्रमुख कार्यक्रम में से एक है जो आकाशवाणी मथुरा वृन्दावन की पहचान है उसके लिए भी एक 3 महीने लिए गए एनाउंसर को चुना जाता है और सीनियर एनाउंसर को नज़रअंदाज़ किया जाता है और जब कोई एनाउंसर सवाल करता है कि सर एक नए और अनुभवहीन को लिया गया है जो अभी अभी आया है उसको क्यों लिया गया है तो अफसरों का जवाब होता है हम आपको जवाब देने को बाध्य नहीं हैं। तो आप चुप चाप देखते रहिये ये खेल अगर कुछ बोले तो आपको बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा।


