
मुंबई : महिलाएं बचत समूहों के माध्यम से बहुत अच्छा काम कर रही हैं। देश की प्रगति के लिए महिलाओं का योगदान और भागीदारी बहुत जरूरी है। महामहिम राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने कहा कि राज्य में शुरू की जाने वाली जेंडर ट्रांसफॉर्मेटिव मैकेनिज्म (जीटीएम) पहल के माध्यम से महिलाओं के सशक्तिकरण में मदद मिलेगी। महामहिम राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी गुरुवार को राजभवन में महिला आर्थिक विकास निगम (MAVIM) द्वारा कार्यान्वित नव तेजस्विनी ‘लिंग परिवर्तनकारी तंत्र’ कार्यान्वयन पहल के शुभारंभ के अवसर पर बोल रहे थे। महिला आर्थिक विकास निगम के प्रबंध निदेशक माननीय रूबल अग्रवाल, परिवर्तनकारी तंत्र के विशेषज्ञ आईएफएडी मुख्यालय रोम माननीय बेलचिका, माननीय मीरा मिश्रा, आईएफएडी इंडिया समन्वयक, रोम, इटली और भारत में आईएफएडी प्रतिनिधियों के साथ-साथ बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन के प्रतिनिधि और वाशिंगटन विश्वविद्यालय, निगरानी और मूल्यांकन, महिला और बाल विकास विभाग और एमएवीआईएम के अधिकारी इस अवसर पर उपस्थित थे।
महामहिम राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने कहा कि राज्य में कृषि विकास के लिए अंतर्राष्ट्रीय कोष और बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन के माध्यम से लागू की गई ‘लिंग परिवर्तन तंत्र’ पहल महिला आर्थिक विकास निगम द्वारा लागू की जाएगी। यह बहुत अच्छी बात है कि अगले पांच वर्षों में इस पहल के क्रियान्वयन के लिए 40 करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता प्रदान की गई है।
महिलाओं के विकास के लिए वैश्विक सहयोग भी जरूरी
महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा लिए गए ऋण का शत-प्रतिशत भुगतान किया गया। लिहाजा बैंक भी उन्हें कर्ज देने को आतुर हैं। महिलाओं के विकास के लिए वैश्विक सहयोग भी जरूरी है। महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए सरकार द्वारा कई पहल और योजनाएं लागू की जाती हैं। किसी भी योजना के लाभार्थी के संवितरण के समय अनुदान सीधे ग्राहक के खाते में जमा किया जाता है। महिलाएं हर क्षेत्र में अग्रणी हैं। शिक्षा बहुत बदल रही है। जाहिर है विकास में महिलाओं का योगदान बढ़ रहा है। प्रत्येक व्यक्ति की प्रगति देश की प्रगति है। आज स्वयं सहायता समूह कई तरह से काम कर सकते हैं। संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2023 को अंतर्राष्ट्रीय पौष्टिक अनाज वर्ष घोषित किया है। माननीय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की अवधारणा के साथ, स्वास्थ्य महत्व और पौष्टिक अनाज की खपत को बढ़ाने के लिए देश भर में जन जागरूकता पैदा की जा रही है। महामहिम राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने कहा कि इसे ध्यान में रखते हुए महिला स्वयं सहायता समूहों को भी पौष्टिक अनाज की संस्कृति को आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।


