
नयी दिल्ली : दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को कहा कि राष्ट्रीय राजधानी अपने वन क्षेत्र को ‘तेजी’ से गंवा रही है और यहां प्रकृति के साथ ‘अन्याय’ किया जा रहा है।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से इस मामले को व्यक्तिगत रूप से देखने को कहा है।
उच्च न्यायालय ने ऐश्वर्या भाटी से उच्चतम न्यायालय के समक्ष समान मुद्दों वाले एक लंबित मामले की स्थिति के बारे में भी पूछा, जिसमें राजधानी में हरित क्षेत्र की कमी भी शामिल है।
उच्च न्यायालय की पीठ ने ऐश्वर्या भाटी से पूछा, ‘‘ यह एक ऐसा मामला है जो इस बात को उजागर करता है कि दिल्ली में वन क्षेत्र तेजी से कम हो रहा है और केंद्रीय रिज क्षेत्र के आस-पास इमारतों का निर्माण किया जा रहा है और असोला अभयारण्य के आस-पास के अतिक्रमण को हटाया नहीं जा रहा है। क्या उच्चतम न्यायालय में लंबित मामले में दिल्ली के वन क्षेत्र का भी ख्याल रखा गया है? ’’
इस पर विधि अधिकारी ने कहा कि शीर्ष अदालत के मामले में सब कुछ शामिल है और वे भी शीर्ष अदालत में सुनवाई का इंतजार कर रहे हैं।
उच्च न्यायालय ने कहा, ‘‘ कृपया व्यक्तिगत रूप से इस पर गौर करें। दिल्ली किसी भी चीज की तरह अपना वन क्षेत्र खो रही है। हम इस मामले की अगली सुनवाई चार हफ्ते बाद करेंगे। न्यायमित्र ने इसे लेकर बहुत अच्छा काम किया है और सभी सूक्ष्म विवरणों को हमारे संज्ञान में लाया है। हमें लगता है कि प्रकृति के साथ अन्याय हो रहा है। हमें आने वाली पीढ़ियों के लिए पहाड़, नदियां और जंगल छोड़ने चाहिए। ’’
उच्च न्यायालय दिल्ली में खराब वायु गुणवत्ता की समस्या से जुड़ी कई जनहित याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था।
अदालत ने अधिकारियों से इस मामले में पारित अपने पहले के आदेशों की अवहेलना का कारण बताने के लिए भी कहा। इस मामले में अगली सुनवाई 13 मार्च को होगी।


