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MUMBAI : बुलेट ट्रेन निर्माण को लाल झंडी

मुंबई : नेशनल हाई-स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) ने हाल ही में हाई-स्पीड रेल परियोजनाओं के निर्माण के लिए निविदाएं आमंत्रित की हैं। भारी लागत वाली इस परियोजना का कार्य कई चरणों में किया जा रहा है। पैकेज सी 1, सी2 और सी 3 के लिए हालिया निविदा प्रक्रिया में, एक संयुक्त उद्यम (जेवी) कंपनी सबसे कम बोली के साथ पैकेज सी1 के लिए अनुबंध जीतने में सफल रही, कहा जाता है कि इस टेंडर से इसी पैकेज में सरकार के 600 करोड़ रुपए बचेंगे।
लेकिन अब इसके आगे की प्रक्रिया में कुछ दिक्कतें आने की संभावना है। सी 1 पैकेज के लिए निविदा जमा करते समय एनएचएसआरसीएल ने निविदा में कोई शर्त या खंड शामिल नहीं किया था। लेकिन सी 2 पैकेज के लिए निविदाएं आमंत्रित करते समय एनएचएसआरसीएल द्वारा निविदाकर्ता कंपनियों को दिए गए कुछ नए शर्ते अब विवाद का कारण बनते दिख रहे हैं।
सी2 पैकेज निविदाएं सादर करते समय निम्नलिखित सशर्त धाराएं शामिल की गई हैं:
• प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि से पिछले तीन वर्षों के दौरान आवेदकों को दिवालियापन और किसी भी समान प्रक्रिया का सामना नहीं करना चाहिए था।
• आवेदकों को आवेदन जमा करने की तारीख तक पिछले तीन वर्षों में किसी भी ऋण का पुनर्गठन या किसी ऋण के लिए आवेदन नहीं करना चाहिए।
• यदि बोली लगाने वाले ने बोली जमा करने की समय सीमा तक पिछले तीन वर्षों में ऋण का पुनर्गठन किया है, तो उसे एक समर्पित “ट्रस्ट एंड रिटेंशन अकाउंट” (टी एंड आर खाता) खोलना होगा और वितरक आपूर्तिकर्ताओं की सूची प्रदान करनी होगी। उप-ठेकेदारों और अन्य सलाहकारों के लिए। ठेकेदार के निर्देशों के अनुसार बैंक वितरकों, उप-ठेकेदारों और अन्य सलाहकारों को भुगतान करेगा। लेकिन ठेकेदार को अभीष्ट उद्देश्य के अलावा अन्य निधियों को डायवर्ट करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
सी1 पैकेज की निविदा प्रक्रिया में एल वन बननेवाली जे.वी कंपनी को भी पॅकेज सी2 के लिये बोली लगाने में मुश्किल होगी। क्योंकि जिन बोलीदाताओं का ऋण पुनर्गठन हो चुका है या इन शर्तों के अनुसार ऋण पुनर्गठन प्राप्त करने की प्रक्रिया में हैं, वे इस निविदा प्रक्रिया में भाग नहीं ले सकते हैं। इस संशोधन के कारण कई सक्षम कंपनियां बोली में भाग नहीं ले पाएंगी। खासकर जब भारतीय बाजार में बहुत कम कंपनियां हैं, जो उच्च लागत वाले टेंडर के अनुसार काम कर सकती हैं। वास्तव में, एनएचएसआरसीएल को इससे नुकसान भी पहुंचेगा और परियोजना को लागू करने के लिए सरकार पर दबाव भी पड़ सकता है। अब ठेकेदार समेत इस क्षेत्र के जानकारों का ध्यान सरकार इन समस्याओं के समाधान के लिए क्या कदम उठा रही है उस पर है।

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