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Bengaluru: बेंगलुरु में विधान सौध के सामने केम्पेगौड़ा, बसवेश्वर की प्रतिमाओं की आधारशिला रखी गयी

बेंगलुरु:(Bengaluru) कर्नाटक विधायिका और सचिवालय (Karnataka Legislature and Secretariat) के कार्यस्थल विधान सौध के सामने बेंगलुरु के संस्थापक नादप्रभु केम्पेगौड़ा और 12वीं सदी के समाज सुधारक बसवेश्वर की प्रतिमाएं स्थापित करने के लिए शुक्रवार को आधारशिला रखी गयी।

मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने विधानसभा अध्यक्ष विश्वेश्वर हेगड़े कागेरी, विधान परिषद के अध्यक्ष बसवराज होरत्ती, पूर्व मुख्यमंत्री बी एस येदियुरप्पा, कई मंत्रियों और विधायकों की मौजूदगी में प्रतिमाओं की आधारशिला रखीं।

सुत्तूर मठ के शिवरात्रि देशीकेंद्र स्वामीजी, पेजावर मठ के विश्वप्रसन्न तीर्थ, श्री आदिचुनचानगिरी महासमस्थान मठ के निर्मलानंदनाथ महास्वामीजी, सिद्दगंगा मठ के सिद्दलिंग महास्वामी जैसे कई प्रतिष्ठित मठ के संत भी इस मौके पर मौजूद रहे।

बोम्मई ने कहा, ‘‘मंत्रिमंडल में इन दोनों दिग्गजों की प्रतिमाएं स्थापित करने का निर्णय लेने के बाद यह जिम्मेदारी राजस्व मंत्री आर अशोक को सौंपी थी। आज कई धार्मिक नेताओं की उपस्थिति में हमने आधारशिला रखी। हमारी मंशा यह है कि इन दो शख्सियतों की प्रशासनिक और आध्यात्मिक विचारधारा और मूल्य इस ‘शक्ति सौध’ के जरिए राज्य में प्रसारित होने चाहिए।’’ विधान सौध को ‘शक्ति सौध’ के नाम से भी जाना जाता है।

उन्होंने कहा कि इनके विचार विधान सौध के भीतर लोगों को ‘नये कर्नाटक’ का निर्माण करने के लिए प्रेरित करने चाहिए जो कि सरकार की मंशा है। उन्होंने कहा, ‘‘काम आज शुरू होगा और डेढ़ से दो महीने में पूरा हो जाएगा, हम सभी को आमंत्रित करके इसका अनावरण करेंगे।’’ आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि इन प्रतिमाओं की स्थापना के लिए आठ करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने इन शख्सियतों को ‘‘माटी के महान पुत्र’’ बताया। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय और कल्याण के शूरवीर बसवेश्वर ने ‘अनुभव मंतपा’ के जरिए दुनिया में सबसे पहले ‘‘लोगों की संसद प्रणाली’’ शुरू की थी जबकि बेंगलुरु के निर्माता केम्पेगौड़ा को आदर्श प्रशासन मुहैया कराने के लिए जाना जाता है।

इन दो शख्सियतों की प्रतिमाएं स्थापित करने को मई में होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है क्योंकि बसवेश्वर और केम्पेगौड़ा राज्य में राजनीतिक रूप से प्रभावशाली दो समुदायों लिंगायत और वोक्कालिगा में श्रद्धेय माने जाते हैं।

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