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Prayagraj : हिमालयी क्षेत्र के अनियमित दोहन से स्थिति गंभीरः रेवतीरमण

दरकतें जोशीमठ को लेकर सांसद रेवतीरमण सिंह ने जताई चिंता
आलोक गुप्ता
प्रयागराज: (Prayagraj)
पूर्व सांसद कुंवर रेवती रमण सिंह (Former MP Kunwar Revati Raman Singh) ने दरकते जोशीमठ को लेकर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि, लोकसभा व राज्यसभा में गंगा व हिमालयी पर्यावरण पर कई बार चिंता व्यक्त की चुकी है। इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी व्यक्तिगत रूप से मिलकर गंगा की दुर्दशा और चार धाम परियोजना से होने वाले दुष्परिणाम को लेकर चिंता व्यक्तकी गई थी।

पूर्व सांसद रेवतीरमण सिंह ने कहा, गंगा और उसका हिमालयी भू-भाग, जोकि भारत की आत्मा, सनातन संस्कृति का उद्गम रहा है, यह सदियों से आध्यात्मिक विकास की यात्रा का केंद्र रहा है। आज विकास के नाम पर गंगा और हिमालय का निर्मम दोहन कर, इसे बाजार के रूप में बदला जा रहा है। जिसके परिणामस्वरूप इसके पर्यावरण पर गंभीर दुष्परिणाम देखने को मिल रहे हैं। ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। पूर्व सांसदने कहा, नीति आयोग की रिपोर्ट बताती है कि 60% जल-श्रोत सूखने की कगार पर हैं। गंगा के क्षेत्र में औसत से तीन गुना अधिक मिट्टी का कटाव हो रहा है। क्लामेट चेंज का खतरा हिमालय पर पहले से बना हुआ है।
रेवतीरमण सिंह ने कहा, हमने 2013 केदारनाथ की आपदा देखी, फिर 2021 में ऋषि गंगा का प्रलय देखा। फिर भी सरकार गंगा और हिमालय को विनष्ट करने पर आमादा है। उन्होंने कहा कि गंगा और उसकी धाराओं पर 7 बांधों के निर्माण की संस्तुति हाल ही में केंद्र ने दी और भी 24 बांधों पर केंद्र ने चुप्पी साध रखी है।
उन्होंने कहा कि लाखों हिमालयी पेड़ (देवदार, बाँझ, बुरांश, चीड़, कैल, पदम् आदि) चारधाम सड़क परियोजना के चौडीकरण में काट दिए गए। इसके चलते 200 से ऊपर भूस्खलन संवेदी ज़ोन पूरे चारधाम मार्ग पर सक्रिय हो गए हैं। कहा, जब सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को सड़क की चौड़ाई का मानक ठीक करने को कहा तो केंद्र ने रक्षा-मंत्रालय को ढाल बनाकर इस हानिकारक प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाया। जब हिमालय टूटकर गिरेगा तो कैसे सेना बॉर्डर तक पहुँच पाएगी। हम यह भूल गए कि स्थाई/स्थिर हिमालय हमारी पहली सुरक्षा-ढाल है। हम हिमालय को ही आज अपूरणीय क्षति पहुंचा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि अब चारधाम को रेलवे नेटवर्क से जोड़ने की तैयारी है। यह सब हिमालयी घाटियों की धारण-क्षमता के विचार को दरकिनार कर अंधाधुंध किया जा रहा है। वैज्ञानिक चेतावनियों को नजरअंदाज कर, यह आत्मघाती कदम हम तेजी से बढ़ा रहे हैं यदि हिमालय न रहा, गंगा न बची तो फिर हम कौन से देश की बात करेंगे, हमारी सभ्यता, संस्कृति और पहचान की कीमत पर हम कौन सा विकास कर लेंगे।
सपा जिला उपाध्यक्ष विनय कुशवाहा ने बताया कि सांसद कुंवर रेवती रमण सिंह दशकों से गंगा व हिमालयी पर्यावरण पर संसद से सड़क तक आवाज उठाते रहे हैं। पर, उनकी हर मांग को अनसुना किया गया जिसका नतीजा आज जोशीमठ में नजर आ रहा था। इसी तरह पुरा हिमालय क्षेत्र खासकर उत्तराखंड पर्यावरण बम पर बैठा है। उन्होंने कहा कि गंगा और हिमालय न केवल अमूल्य पर्यावरणीय संसाधन अपितु हमारी सांस्कृतिक, आध्यात्मिक राष्ट्रीय धरोहर भी है।

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