
उल्हासनगर : नागपुर के विधानमंडल के चल रहा शीतकालीन सत्र के दौरान नकली दस्तावेजों के आधार पर उल्हासनगर शहर में सरकारी जमीन पर सनद जारी किया जा रहा है। भू-अभिलेख विभाग के राज्य जमाबंदी आयुक्त, जिलाधिकारी, एवं भू-अभिलेख विभाग के उपाधीक्षक के खिलाफ जांच कर कार्रवाई करने की लिखित मांग विधायक डॉ. बालाजी किणीकर ने राज्य के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से किया है। इस मांग पर सकारात्मक प्रतिसाद देते हुए मुख्यमंत्री ने राजस्व विभाग के अपर मुख्य सचिव को जांच कर रिपोर्ट देने के आदेश दिया हैं। भारत-पाकिस्तान विभाजन के समय विस्थापित हुए सिंधी भाइयों को उल्हासनगर शहर में बसाया गया है। विभाजन के कारण विस्थापित हुए इन नागरिकों को उनका उचित स्थान मिलना चाहिए।
सनद को भू-स्वामित्व के रूप में प्रदान किया गया
इसके लिए भारतीय विस्थापित व्यक्ति अधिनियम के तहत सनद को भू-स्वामित्व के रूप में प्रदान किया गया है। हालांकि पिछले कुछ सालों से नकली दस्तावेजों के आधार पर सरकारी जमीन या अनुपयोगी जमीन का अधिग्रहण किया गया खुले प्लाटों पर सनद दी जाती है। ऐसा मामला सामने आया है। इसी संदर्भ में उदाहरण देते हैं उल्हासनगर-5 के अंतर्गत महानगरपालिका स्कूल क्रमांक 19 व 22 स्कूल से सटा खुले मैदान की सिंधु एजुकेशन सोसायटी-बी.जी. तिलक नाम की संस्था को सनद दिया गया है। यह सनद अवैध रूप से जारी किया गया था। इसे तत्काल रद्द किया जाना चाहिए। साथ ही नकली दस्तावेज के आधार पर सनद देने के मामले में राज्य जमाबंदी आयुक्त, उल्हासनगर के जिलाधिकारी व भू-अभिलेख विभाग के उपाधीक्षक की जांच कर उनके खिलाफ कार्रवाई किया जाय। ऐसी मांग विधायक किणीकर ने पत्र में किया है।


