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कीट्स का पत्र फेनी के नाम

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विख्यात अंग्रेजी कवि जॉन कीट्स ( 1795-1821) का फैनी ब्राउन के प्रति बहुत महरा, आवेग भरा प्रेम था, जो अंत तक अतृप्त ही रहा। 23 वर्ष में उसकी भेंट फैनी से हुई थी और उसके कुछ ही अरसे बाद उसे पता चल गया था, कि वह टी.बी. का मरीज है। इसके बाद उसने उससे विवाह के बारे में सोचना ही छोड़ दिया। 1921 में वह रोम चला गया, जहां उसी वर्ष मात्र 26 वर्ष की उम्र में उसका निधन हो गया।

तुम हमेशा नई लगती हो

मधुरतम फेनी,
मार्च 1820

कभी-कभी तुम डरती हो कि मैं तुमसे उतना प्यार नहीं करता जितना, तुम चाहती हो माय डियर गर्ल, मैं तुम्हें हमेशा और हमेशा प्यार करता हूं और बिना किसी किस्म की हिचक के मैंने तुम्हें जितना ज्यादा जाना है, उतना ही ज्यादा तुमसे प्यार किया है। हर तरह से और तो और, मेरी ईष्याएं भी मेरे प्यार की प्रताड़नाएं रही हैं, क्रोध के सबसे उत्तेजनात्मक क्षणों में भी मैं तुम्हारे लिए तुरंत प्राण दे देता। मैंने बहुत परेशान किया है तुम्हें, पर सिर्फ प्यार की खातिर। कभी तो क्या? तुम हमेशा नई लगती हो मुझे। तुम्हारे आखिरी चुंबन सबसे ज्यादा मीठे, तुम्हारी आखिरी मुस्कुराहट सबसे ज्यादा खिली हुई और तुम्हारी आखिरी मुद्राएं सबसे ज्यादा लुभावनी लगती हैं। कल जब तुम मेरी खिड़की के सामने से गुजरीं, तो मैं इतनी ज्यादा प्रशंसा से भर उठा, जैसे मैं तुम्हें पहली बार देख रहा होऊ।

एक बार तुमने आधी-सी शिकायत की थी कि मैं सिर्फ तुम्हारे सौंदर्य से प्यार करता हूं। क्या इसके अलावा तुम्हारे में और कुछ नहीं है, जिसे मैं प्यार करूं? क्या मैं इसके अंदर के उस हृदय को नहीं देखता, जो अपने पंखों में मुझे छिपा लेना चाहता है? कोई बुरी से बुरी संभावना भी तुम्हारे विचार को मुझसे अलग नहीं कर पाती। शायद यह जितने आनंद की बात है, उतने ही दुख की भी पर मैं इस बारे में बात नहीं करूंगा। तुम अगर मुझसे प्यार न भी करतीं, तो भी मैं तुम्हारे प्रति पूरी तरह समर्पित रहता, पर जब मैं जानता हूं कि तुम भी मुझसे प्यार करती हो, तो यह समर्पण कितना ज्यादा गहरा होगा। मेरा मस्तिष्क इतनी छोटी देह में बैठाया गया शायद सबसे असंतुष्ट और अशांत मस्तिष्क है। मेरा मस्तिष्क किसी भी चीज पर संपूर्ण और निर्विघ्न आनंद के साथ स्थिर नहीं रहा, सिवा एक तुमको छोड़कर तुम मेरे कमरे में होती हो तो मेरे विचार कभी खिड़की से बाहर तक नहीं जाते। मेरा पूरा ध्यान तुम पर ही रहता है।

हमारे इस प्रेम के प्रति तुम्हारे पत्रों में झलकती व्यग्रता मेरे लिए बहुत आनंददायक होती है। पर तुम्हें इस तरह आशंकाओं में घिरकर अपने-आपको आहत नहीं करना चाहिए। न ही कभी मैं ऐसा सोच भी सकता हूं कि मेरे प्रति तुम्हारे मन में जरा-सी भी शिकायत है। ब्राउन बाहर गया हुआ है, लेकिन श्रीमती विली यहीं है जब वे चली जाएंगी, तो मैं तुम्हारे लिए जागता रहूंगा। अपनी मां को मेरा अभिवादन देना।

स्नेहपूर्वक तुम्हारा
जे. कीट्स

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