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एक वालेंटियर सोल्जर का अपनी प्रेमिका को पैगाम

अल्फ्रेड चैटर लंदन रेजीमेंट के एक वालेंटियर सोल्जर थे। अगस्त 1914 में पहले विश्व युद्ध की शुरुआत के साथ सेना ने उन्हें एक्टिव सर्विस के लिए बुला लिया। तीन महीने की ट्रेनिंग के बाद उन्हें फ्रांस भेज दिया गया। ट्रेनिंग कैम्प के आखिरी दिन उसने अपनी प्रेमिका को ये पत्र लिखा…

डार्लिंग जॉय,
अक्टूबर 25,1914 (ट्रॅवेली हाउस)

युद्ध पर जाने से पहले मैं तुम्हें सिर्फ एक लाइन लिखना चाहता हूं। अब ये ईश्वर को ही पता है कि हम दोनों की मुलाक़ात दोबारा कब होगी,लेकिन उससे पहले मैं तुम्हें आखिरी बार अलविदा कहना चाहता हूं।

मैं घर जाने के लिए बहुत बेताब था, लेकिन कल दोपहर में अचानक हेडक्वार्टर से मेरे लिए बुलावा आया। हमें बताया गया कि सोमवार को हमें फ्रांस रवाना होना है। मुझे यकीन नहीं हो रहा था की हम जा रहे हैं, लेकिन ये सच था। हमें नई राइफल्स दी गईं हैं और उम्मीद है कि रात तक हम साउथेम्पटन में होंगे।

काश इस पल तुम मेरे सामने होती! मैं तुमसे मिलकर तुम्हें अलविदा कहना चाहता हूं, लेकिन जो हो रहा है शायद वही सही है। तुम्हें मेरा आखिरी सलाम और अगर ईश्वर ने चाहा तो शायद हम फिर मिल सकेंगे।

तुम जानती हो कि मैं चाहे जब वापस लौटूं तुम्हारे लिए मेरे मन में वही भावना रहेगी जो आज है। मुझे जब भी मौका मिलेगा मैं सीधा तुम्हारे पास ही वापस आऊंगा और तुमसे यहीं कहूंगा कि देखो मैं वापस आ गया।

लड़ाई भी एक अजीब सा मजाक है। हम सब जाते हुए हंस रहे हैं, लेकिन सबके दिलों में खौफ है। लड़ते हुए कौन कब शहीद हो जाए नहीं पता, लेकिन वापस आने के बाद इन्हीं दिनों को सब अपने यादगार दिन बताते हैं।

गुडबाय डार्लिंग, ईश्वर तुम्हें लंबी उम्र दे।

गुडबाय लिटिल गर्ल मिकी।

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