
राजा राम मोहन रॉय एक भारतीय समाज सुधारक थे। उनका जन्म 22 मई 1772 को हुआ था। वे 1828 में ब्रह्मो सभा के संस्थापकों में से एक थे। रॉय भारतीय उपमहाद्वीप के एक सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलन ‘ब्रह्म समाज’ के अग्रदूत थे। उन्हें मुगल सम्राट अकबर द्वितीय द्वारा राजा की उपाधि दी गई थी। राजनीति, लोक प्रशासन, शिक्षा और धर्म के क्षेत्रों में उनका प्रभाव स्पष्ट था। उन्हें सती प्रथा और बाल विवाह की प्रथा को समाप्त करने के प्रयासों के लिए जाना जाता था। कई इतिहासकारों द्वारा रॉय को “बंगाल पुनर्जागरण का जनक” माना जाता है। 2004 में, बीबीसी के सर्वकालिक महान बंगाली सर्वेक्षण में रॉय को 10 वें स्थान पर रखा गया था। उनकी मृत्यु 27 सितंबर1833 में हुई थी।
पाप कर्म का त्याग करना तथा उसके लिए प्रायश्चित करना मोक्ष का साधन है। विचलित करने वाले अन्धविश्वासी हैं, धर्माध हैं, वे पूरे समाज में अन्धकार फैलाना चाहते हैं। केवल ज्ञान की ज्योति द्वारा ही मानव मन के अंधकार को दूर किया जा सकता है। मैं हिन्दू धर्म का नहीं, उसमें व्याप्त कुरीतियों का विरोधी हूं। हिन्दी में अखिल भारतीय भाषा बनने की क्षमता है। हमारे समाज के लोग यह समझते हैं कि नदी में नहाने से, पीपल की पूजा करने से और पंडित को दान करने से हमारे पाप धुल जाएंगे। जो ऐसा समझते हैं, वे भूल कर रहे हैं। उन्हें नदी में स्नान करने से कभी मुक्ति नहीं मिल सकती, वे अंधविश्वास के अंधेरे में भटक रहे हैं। ज्ञान की ज्योति से मानव मन के अन्धकार को दूर किया जा सकता है। हिन्दी में अखिल भारतीय भाषा बनने की क्षमता है। प्रत्येक स्त्री को पुरूषों की तरह अधिकार प्राप्त हो, क्योंकि स्त्री ही पुरूष की जननी है। हमें हर हाल में स्त्री का सम्मान करना चाहिए। यह व्यापक विशाल विश्वब्रह्म का पवित्र मन्दिर है, शुद्ध शास्त्र है। श्रद्धा ही धर्म का मूल है, प्रेम ही परम साधन है। स्वार्थों का त्याग ही वैराग्य है। अन्धविश्वास के अंधेरे से बाहर निकलो। साधारण दिखने वाले लोग ही दुनिया के सबसे अच्छे लोग होते हैं। यही वजह है कि भगवान ऐसे बहुत से लोगों का निर्माण करते हैं। परमात्मा केवल एक ही है। उसका कोई अंत नहीं है। सभी जीवित वस्तुओं में परमात्मा का अस्तित्व है।


