दिशा सिंह

हर साल हिंदी दिवस (Hindi Diwas)14 सितंबर को मनाया जाता है। प्रबुद्ध सोसायाटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ प्रकाश बरनवाल का कहना है कि 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने यह निर्णय लिया कि हिंदी केन्द्र सरकार की आधिकारिक भाषा होगी। यह निर्णय इसलिए लिया गया, क्योंकि हिंदी पूरे देश में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है। इसी कारण हिंदी को राज्यभाषा बनाया गया था। हिंदी का प्रसारण और महत्व पूरे देश के विभिन्न कोने में फैलाने के लिए वर्ष 1953 से प्रतिवर्ष 14 सितंबर को हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है। सबसे पहले वर्ष 1918 में महात्मा गांधी ने हिंदी साहित्य सम्मलेन में हिंदी को राजभाषा बनाने की मांग की थी। उन्होंने हिंदी को ‘जनमानस’ की भाषा भी कहा था। परंतु स्वतन्त्रता प्राप्ति के बाद हिंदी को आधिकारिक भाषा के रूप में स्थापित करवाने के लिए काका कालेलकर, हजारीप्रसाद द्विवेदी, सेठ गोविंददास आदि साहित्यकारों को साथ लेकर राजेन्द्र सिंह ने निरंतर प्रयास किए।
कहा जाता है की हिंदी एक ऐसी भाषा है जो उसके उच्चारण के जैसे ही लिखी जाती है। हिंदी भाषा को पूरे विश्व में बहुत सराहना दी जाती है। हिंदी के कुछ शब्द जैसे ‘अच्छा’, ‘बड़ा दिन’, ‘बच्चा’, ‘सूर्य नमस्कार’ और यहां तक कि संविधान और आत्मनिर्भर जैसे शब्दों को ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी में शामिल किया गया है। यहां तक की अंग्रेज़ी भाषा ने हिंदी से कई शब्द उधार लिए हैं, जैसे- अवतार, बंदाना, बंगलों, गुरु, जंगल, खाकी, कर्मा, लूट, मंत्रा, निर्वाना, पैजामा, शरबत, शैम्पू, योगा आदि।
भले ही अंग्रेजी भाषा पूरे विश्व में सबसे ज्यादा बोलने वाली भाषा है, परंतु भारत की राजभाषा हिंदी, विश्व की दूसरी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है। दुनिया के 176 विश्वविद्यालयों में हिंदी एक विषय के तौर पर पढ़ाई जाती है। इस हिंदी भाषा की प्रतिमा और प्रतिष्ठा को कायम रखना हम भारतीयों का सौभाग्य है और हमें इसे कायम रखना चाहिए।


