
विश्वास
तेज बह रही हवा तथा बारिश में एक बार जुम्बराती नामक एक आदमी ने विश्व प्रसिद्ध नियाग्रा जल प्रपात पर रस्सी बांधकर उस रस्सी को पार करने की कलाबाजी सफलतापूर्वक दिखाई तो एक दर्शक ने इच्छा व्यक्त की, कि वो एक बार फिर उस रस्सी पर चलकर वापस आए और उस पर एक हाथगाड़ी धकेलते हुए रस्सी पार करे। वह दर्शक बहुत सोच-विचार कर उस हाथगाड़ी को अपने साथ लाया था। महान जुम्बराती दोबारा यह करतब दोहराने में हिचक रहा था, खास करके इस भयानक शर्त के साथ, पर वह दर्शक बार-बार जोर दे रहा था- ‘आप ऐसा कर सकते हैं, मैं जानता हूं कि आप फिर से ऐसा कर सकेंगे।’ बैठ जाइए।’ जोर देकर कहा । ‘ठीक है’, जुम्बराती ने कहा- ‘तो फिर ऐसा कीजिए कि आप उस हाथगाड़ी में ‘आपको पूरा विश्वास है कि मैं ऐसा कर सकता हूं।’ जुम्बराती ने पूछा। ‘निश्चित रूप से, हां आप ऐसा अवश्य कर सकते हैं।’ दर्शक ने पूरे विश्वास से ज़ोर देकर कहा| ठीक है जुम्बराती ने कहा ‘तो फिर ऐसा कीजिए कि आप उस हाथगाड़ी में बैठ जाइए।


