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जोनेथन स्विफ्ट को कुमारी वेनेसा का पत्र

आयरलैंड के प्रसिद्ध कवि और व्यंगकार जोनेथन स्विफ्ट के प्रेम में वेनेसा ने अविवाहित जीवन को स्वीकारा, क्योंकि उसके मनोभावों के प्रति उपेक्षा भाव रखने वाले स्विफ़्ट के जीवन में एक अन्य स्त्री एस्थर जॉनसन थी। इन तीनों को लेकर अंग्रेजी में काफी साहित्य लिखा गया है।

मैं तुम्हें दोष नहि दे सकती…

कैंब्रिज, 1720

प्रिय,

यकीन मानो, यह बड़ हा दुख की बात है कि आज मुझे तुमसे शिकायत करनी पड़ रही है, क्योंकि मैं जानती हूं कि तुम्हारा स्वभाव इतना अच्छा है कि किसी भी मनुष्य को दुखी देखकर तुम्हारा दिल रोए बिना रह ही नहीं सकता। फिर भी मैं क्या करूं? या तो मुझे अपने दिल को खाली करना पड़ेगा और अपने दुख तुमसे कहने पड़ेंगे, नहीं तो मैं तुम्हारी इस अजीब उपेक्षा की अकथनीय पीड़ा के नीचे घुट-घुटकर मर जाऊंगी। दस लंबे सप्ताह बीत चुके हैं, जब मैं तुमसे मिली थी और इसके बीच एक पत्र और बहाने भरी दो पंक्तियों के सिवाय कुछ भी तो मुझे तुमसे नहीं मिला। आह ! कैसे मुझे तुम अपने से दूर छिटकाना चाहते हो। मैं तुम्हें दोष भी नहीं दे सकती, क्योंकि अपनी इस पीड़ा और घबराहट को लेकर मैं तुम्हारे लिए केवल दुखद चिंता का कारण ही तो बनती हूं। मैं तुम्हें जरा-सा सुख भी नहीं दे सकती, लेकिन इस बात की मैं यहां घोषणा करती हूं कि कला, समय अथवा आकस्मिकता, किसी के भी वश की यह बात नहीं है कि उस अकथनीय चाह को कम कर सके, जो मुझमें तुम्हारे लिए है। मेरी चाह पर सख्त से सख्त रोक लगा दो, मुझे अपने से इतनी दूर भेज दो जितना कि इस धरती पर मुझे भेजा जा सके, तब भी तुम उन प्यार-भरे खयालों को मुझसे दूर नहीं कर सकते, जो मुझसे तब तक चिपके रहेंगे जब तक कि मुझमें स्मरण शक्ति है। वह प्यार, जो मुझे तुम्हारे लिए है, सिर्फ मेरी आत्मा में निहित नहीं है, बल्कि मेरे शरीर का एक भी अणु ऐसा नहीं है, जिसमें वह रमा हुआ न हो। इसलिए… मत सोचो कि वियोग मेरे खयालों को बदल पाएगा.. क्योंकि जब भी मैं अकेली होती हूं, अपने को बेचैन पाती हूं और मेरा दिल दुख और प्यार से बिंध जाता है। भगवान के लिए बताओ कि किस बात ने यह अजीब परिवर्तन तुममें पैदा किया है, जिसे मैं कुछ समय से तुममें देख रही हूं? अगर तुम्हारे दिल में मेरे लिए जरा भी दया बाकी हो तो मुझे बताओ। नहीं, मत बताओ, जिससे यह दुख मेरी मौत का कारण बन जाए और इस धीमी मौत जैसी जिंदगी की यातना से मेरा छुटकारा हो जाए, क्योंकि यदि तुम्हारे मन में मेरे लिए कोई कोमल भावना बची ही नहीं है, तो ऐसी ही जिंदगी तो मुझे जीनी पड़ेगी।

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