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रोजाना एक कविता : आज पढें स्मिता सिन्हा की कविता

जब साथ चलने वाले क़दम तेज हों
तो थोड़ा धीमा कर लो
अपने क़दमों को तुम
थम कर चलो
सध कर चलो
नहीं तो लड़खड़ा कर गिर पड़ोगे
वहीं रास्ते पर
कि सफ़र पर बने रहना भी एक कला है

शुक्र मनाओ कि
किसी सफ़र पर हो तुम
मंज़िल दर मंज़िल का सफ़र
कि तुम्हारे पास रास्ते हैं
जो अभ्यस्त हैं
धूल और धूप के
तुम्हारे क़दमों के

शुक्र मनाओ कि
तुम बदल सकते हो रास्ते
जब अनावृत होने लगे ज़िंदगी
पुराने रास्तों के जंजालो में उलझकर
खोने लगे तुम्हारा चेहरा
असंख्य हताश निराश चेहरों की भीड़ में
रिसते चिपचिपे रास्तों पर
चलने से कई गुणा बेहतर है
रास्ते बदल देना

शुक्र मनाओ कि
सिर्फ़ तुम्हारे लिये बना है
वो एक रास्ता
जहाँ विचर सकते हो तुम
बिल्कुल मौन
उस विभ्रम की स्थिति में
खोज सकते हो
जीवन का सारांश
ये रास्ते ही प्रेक्षक हैं
तुम्हारे यायावरी के
उत्सव मनाओ कि
एक यायावर हो तुम…

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