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रोजाना एक कविता : आज पढ़ें प्रेम के कोमल एहसासों से सराबोर कविता इजहारे इश्क

किसी से इश़्क करना चाहिए था
मुझे हद से गुज़रना चाहिए था

वो आँखों में उतरकर रह गया है
जिसे दिल में उतरना चाहिए था

मुहब्बत पाके भी तुम ख़ुश नहीं हो
तुम्हें तो डूब मरना चाहिए था

ये क्या पहली दफ़ा में भर ली हामी
ज़रा-सा तो मुकरना चाहिए था

हमें तन्हाई रास आने लगी है
तुम्हारा साथ वरना चाहिए था

New Delhi : कांग्रेस नेताओं ने बजट को बताया गरीब विरोधी और आम जनता से कटा हुआ

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