spot_img

राजा रानी किसी का पानी

राजा रानी किसी का पानी नहीं भरते हैं हम 
सींच कर बागों को अपने अब हरा करते हैं हम। 
शर्म से सिकुड़ी हुई इस देह को हैं तानते 
दोस्तो, अपने झुके कन्धे खड़ा करते हैं हम। 
ऐसा करने में है जलता ख़ून, तुम मत खेल जानो 
मोम जैसे दिल को पत्थर-सा कड़ा करते हैं हम। 
मान जाएँ हार अपने ऐसी तो आदत नहीं 
बाद मरने के भी काफ़िर मौत से लड़ते हैं हम। 
आग भड़काने के पीछे अपना ही घर फूँक डालें 
सोचिएगा मत कि ख़ाली शायरी करते हैं हम।
-रमाशंकर यादव ‘विद्रोही’ 

Islamabad : पाकिस्तान में ‘ब्लास्फेमी बिजनेस’ का विस्तार, फर्जी डिजिटल सबूतों के सहारे दर्ज हो रहे मामले

इस्लामाबाद : (Islamabad) पाकिस्तान में डिजिटल माध्यमों से कथित ईशनिंदा (ब्लास्फेमी) के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। मानवाधिकार संगठनों ने इसे...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Explore our articles