व्यायाम को लोग जितना महत्व देते हैं, उतना महत्व योग को नहीं मिल पाता है। पर आपको बता दें कि योग शरीरिक स्वास्थ के लिए बेहद फायदेमंद है। यह वह प्रक्रिया है जो शरीर, सांस और दिमाग को एक साथ जोड़ने का काम करती है। नियमित योगासन शरीर को कई तरह की बीमारियों से दूर रखता है। पर यह उन लोगों के लिए एक चुनौती भरा काम है, जिन्हें योगासन के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं। इसलिए यहां हम आपको योगाभ्यास शुरू करने के लिए कुछ जरूरी योगासन के बारे में बताएंगे। इसे आप आसानी से सिख सकते हैं। योग यात्रा शुरू करने के पहले बता दें कि ये पोज आपको उर्जावान बनाएंगे। इसके साथ ही आपको दिमागी और शारीरिक तौर भी स्वस्थ रखेंगे। तो चलिए फिर शुरू करते हैं।

ताड़ासन (माउंटेन पोज)
माउंटेन पोज़ को संस्कृत में ताड़ासन भी कहा जाता है। यह एक स्थायी मुद्रा है जो कई अन्य योग मुद्राओं के लिए नींव का काम करती है। ताड़ासन पैरों को मजबूत करता है। यह शरीर के संतुलन को बनाए रखता है। मन को शांत रखने में ताड़ासन अहम भूमिका निभाता है।
उत्कटासन (चेयर पोज)
उत्कटासन पैरों, कूल्हों और पीठ की मांसपेशियों को टार्गेट करता है। इसमें संतुलन, स्थिरता और फोकस की आवश्यकता होती है, जिससे यह शरीर की समग्र शक्ति के निर्माण के लिए एक बेहतरीन मुद्रा बन जाती है।
उत्तानासन (स्टैंडिंग फॉरवर्ड बेंड)
उत्तानासन एक ऐसा योगाभ्यास है, जो सूर्य नमस्कार में गिना जाता है। उत्तानासन हैमस्ट्रिंग, पिंडलियों और रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाता है। यह तनाव को कम करने और दिमाग को शांत करने में भी मदद करता है। पाचनतंत्र को मजबूत बनाता है। यह गर्दन की हड्डियों को मजबूती प्रदान करता है।
अर्ध उत्तानासन (हाफ फॉरवर्ड बेंड)
अर्ध उत्तानासन सूर्यनमस्कार का हिस्सा है। यह मांसपेशियो को आराम देता है और शरीर के लचीलेपन में सुधार करता है। अर्ध उत्तानासन मांसपेशियों में होने वाले दवाब या खिंचाव को कम करता है। इसके साथ ही पैरों और रीढ़ की हड्डियों को यह मजबूत बनाता है।
फलकासन (प्लैंक पोज)
फलकासन में शरीर का संतुलन दोनों हाथों पर बनाना होता है। इसका नियमित अभ्यास पेट के फैट को कम करने में मदद करता है। इसमें संतुलन, स्थिरता और फोकस की जरूरत होती है। फलकासन के नियमित अभ्यास से मसल्स लचीले और मजबूत बनते हैं। यह शरीर को ताकत देता है और मानसिक विकारों को दूर करता है। स्टैमिना को बढ़ाने में मदद करता है।
ताड़ासन (माउंटेन पोज)
माउंटेन पोज़ को संस्कृत में ताड़ासन भी कहा जाता है। यह एक स्थायी मुद्रा है जो कई अन्य योग मुद्राओं के लिए नींव का काम करती है। ताड़ासन पैरों को मजबूत करता है। यह शरीर के संतुलन को बनाए रखता है। मन को शांत रखने में ताड़ासन अहम भूमिका निभाता है।
उत्कटासन (चेयर पोज)
उत्कटासन पैरों, कूल्हों और पीठ की मांसपेशियों को टार्गेट करता है। इसमें संतुलन, स्थिरता और फोकस की आवश्यकता होती है, जिससे यह शरीर की समग्र शक्ति के निर्माण के लिए एक बेहतरीन मुद्रा बन जाती है।
उत्तानासन (स्टैंडिंग फॉरवर्ड बेंड)
उत्तानासन एक ऐसा योगाभ्यास है, जो सूर्य नमस्कार में गिना जाता है। उत्तानासन हैमस्ट्रिंग, पिंडलियों और रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाता है। यह तनाव को कम करने और दिमाग को शांत करने में भी मदद करता है। पाचनतंत्र को मजबूत बनाता है। यह गर्दन की हड्डियों को मजबूती प्रदान करता है।
अर्ध उत्तानासन (हाफ फॉरवर्ड बेंड)
अर्ध उत्तानासन सूर्यनमस्कार का हिस्सा है। यह मांसपेशियो को आराम देता है और शरीर के लचीलेपन में सुधार करता है। अर्ध उत्तानासन मांसपेशियों में होने वाले दवाब या खिंचाव को कम करता है। इसके साथ ही पैरों और रीढ़ की हड्डियों को यह मजबूत बनाता है।
फलकासन (प्लैंक पोज)
फलकासन में शरीर का संतुलन दोनों हाथों पर बनाना होता है। इसका नियमित अभ्यास पेट के फैट को कम करने में मदद करता है। इसमें संतुलन, स्थिरता और फोकस की जरूरत होती है। फलकासन के नियमित अभ्यास से मसल्स लचीले और मजबूत बनते हैं। यह शरीर को ताकत देता है और मानसिक विकारों को दूर करता है। स्टैमिना को बढ़ाने में मदद करता है।
भुजंगासन (कोबरा पोज)
भुजंगासन को सर्पासन, कोबरा आसन या सर्प मुद्रा भी कहा जाता है। यह रीढ़ की हड्डी को मजबूती प्रदान करता है। मेटाबॉलिज्म में सुधार करने के साथ वजन कम करने में भुजंगासन मदद करता है। यह डिप्रेशन को भी दूर करता है।
बालासन (चाइल्ड पोज)
योग की शुरुआत में बालासन को अपने रूटीन में जरूर शामिल करें। इससे आपके शरीर को काफी आराम पहुंचता है। शरीर में होने वाले सभी दर्द के लिए बालासन रामबाण की तरह है। ज्यादा समय तक बैठकर काम करने वालों के लिए बालासन बेहद फायदेमंद है। यह कब्ज से राहत दिलाता है।
सुखासन (इजी पोज)
सुखासन बहुत ही आसान योगासनों में से एक है। योग की शुरुआत में इस आसन को जरूर अपनाएं। इसके बहुत सारे हेल्थ बेनिफिट्स हैं। सुखासन पेट के लिए काफी फायदेमंद है। यह पाचनक्रिया को दुरूस्त करता है। यह तनाव को कम करता है और शरीर में ब्लडसर्कुलेशन को बेहतर बनाता है। यह एकाग्रता को बढ़ाता है।
अधो मुख श्वानासन (डाउनवर्ड-फेसिंग डॉग पोज)
सूर्य नमस्कार के दौरान अधोमुख श्वान मुद्रा का भी काफी महत्व है। यह शरीर को सुडौल बनाता है। यह सिरदर्द और पीठ दर्द से छुटकारा दिलाता है। नींद की कमी को दूर करता है। थकान से राहत दिलाता है। अधो मुख श्वानासन तनाव कम करने के साथ डिप्रेशन का भी इलाज करता है। दिमाग को शांत करता है। रीढ़ को आराम देने के लिए अधो मुख श्वानासन एक बेहतरीन पोज है।
वृक्षासन (ट्री पोज)
वृक्षासन का नाम ‘वृक्ष’ यानी पेड़ से लिया गया है। इस आसन को पेड़ की तरह तनकर खड़े होकर किया जाता है। यह पैरों की मजबूती और बैलेंस को बनाने में मदद करता है। शारीरिक संतुलन को सुधारता है। इससे अलर्टनेस और एकाग्रता बढ़ती है। वृक्षासन कटिस्नायुशूल (साइटिका) से पीड़ित लोगों की मदद करता है।
भुजंगासन
भुजंगासन को सर्पासन, कोबरा आसन या सर्प मुद्रा भी कहा जाता है। यह रीढ़ की हड्डी को मजबूती प्रदान करता है। मेटाबॉलिज्म में सुधार करने के साथ वजन कम करने में भुजंगासन मदद करता है। यह डिप्रेशन को भी दूर करता है।
बालासन (चाइल्ड पोज)
योग की शुरुआत में बालासन को अपने रूटीन में जरूर शामिल करें। इससे आपके शरीर को काफी आराम पहुंचता है। शरीर में होने वाले सभी दर्द के लिए बालासन रामबाण की तरह है। ज्यादा समय तक बैठकर काम करने वालों के लिए बालासन बेहद फायदेमंद है। यह कब्ज से राहत दिलाता है।
सुखासन (इजी पोज)
सुखासन बहुत ही आसान योगासनों में से एक है। योग की शुरुआत में इस आसन को जरूर अपनाएं। इसके बहुत सारे हेल्थ बेनिफिट्स हैं। सुखासन पेट के लिए काफी फायदेमंद है। यह पाचनक्रिया को दुरूस्त करता है। यह तनाव को कम करता है और शरीर में ब्लडसर्कुलेशन को बेहतर बनाता है। यह एकाग्रता को बढ़ाता है।
अधो मुख श्वानासन (डाउनवर्ड-फेसिंग डॉग पोज)
सूर्य नमस्कार के दौरान अधोमुख श्वान मुद्रा का भी काफी महत्व है। यह शरीर को सुडौल बनाता है। यह सिरदर्द और पीठ दर्द से छुटकारा दिलाता है। नींद की कमी को दूर करता है। थकान से राहत दिलाता है। अधो मुख श्वानासन तनाव कम करने के साथ डिप्रेशन का भी इलाज करता है। दिमाग को शांत करता है। रीढ़ को आराम देने के लिए अधो मुख श्वानासन एक बेहतरीन पोज है।
वृक्षासन (ट्री पोज)
वृक्षासन का नाम ‘वृक्ष’ यानी पेड़ से लिया गया है। इस आसन को पेड़ की तरह तनकर खड़े होकर किया जाता है। यह पैरों की मजबूती और बैलेंस को बनाने में मदद करता है। शारीरिक संतुलन को सुधारता है। इससे अलर्टनेस और एकाग्रता बढ़ती है। वृक्षासन कटिस्नायुशूल (साइटिका) से पीड़ित लोगों की मदद करता है।
लेखिका: नीलम चौहान


