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मानव जीवन की सबसे बड़ी दुविधा यह है कि उसकी संवेदना एकतरफ़ा है। अगर आप प्रकाश देखते हैं तो आप अंधेरा नहीं देख सकते। ठीक उसी तरह आप मौन को नहीं सुन सकते अगर आप ध्वन‍ि सुनते हैं। जीवन ऐसे ही विरोधाभासों का पुल‍िंदा है। ऐसे में अगर हमें जीवन पथ पर सुगमता से चलना है तो समझना होगा क‍ि अंधेरा क्या है और उजाला क्या। ‘उजाले की ओर’ पुस्तक में उजाला, आशा, साहस, असफलता पर आधारित विचार संकलित हैं। यह पुस्तक नहीं बल्कि जीवन को जीने का तरीका सिखाती है। सकारात्मक सोच, किस प्रकार हमारे अंदरूनी और बाहरी व्यक्तित्व को प्रभावित कर सकती है, यह हम इस पुस्तक से जान पाते है। किताब में बताया गया है कि किस प्रकार हम जीवन में आशा और विश्वास के साथ स्वयं से प्रेम करना सीखें। यह पुस्तक एक टॉर्च हैं, रोशनी है, उजाला है। इस उजाले में जब हम कुछ कर गुजरने के लिए खुद को तैयार करते हैं तब यही पुस्तक एक मशाल बन जाती हैं और हमें उजाले की ओर ले चलती है।