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New Delhi : यंत्र इंडिया लिमिटेड को मिला ‘मिनीरत्न’ श्रेणी-I का दर्जा, ​रक्षा मंत्री ने मंजूरी दी

New Delhi: Yantra India Limited granted 'Miniratna' Category-I status; Defence Minister approves

कंपनी को 500 करोड़ रुपये तक का पूंजीगत व्यय करने का अधिकार मिला
नई दिल्ली : ​ (New Delhi)
​​यंत्र इंडिया लिमिटेड (वाईआईएल) (Yantra India Limited) को ‘मिनीरत्न’ श्रेणी-I का दर्जा (‘Miniratna’ Category-I status) ​मिल गया है। ​इससे कंपनी को सरकार की मंजूरी के बिना नए प्रोजेक्ट, आधुनिकीकरण, उपकरण खरीद आदि पर ​500 करोड़ रुपये तक का पूंजीगत व्यय करने का अधिकार प्राप्त हो गया है। रक्षा मंत्री ने रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (डीपीएसयू) को​ चार वर्षों के कम समय में सरकारी संगठन से लाभ कमाने वाली कंपनी में परिवर्तित होने पर बधाई दी।

वाईआईएल ने स्थापना के बाद से कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां अर्जित की हैं, जिसमें 2021-22 (दूसरी छमाही) में 956.32 करोड़ रुपये की बिक्री से वित्त वर्ष 2024-25 में 3,108.79 करोड़ रुपये तक की वृद्धि शामिल है। निर्यात के मोर्चे पर​ कंपनी ने वित्त वर्ष 2021-22 (दूसरी छमाही) में शून्य से वित्त वर्ष 2024-25 में 321.77 करोड़ रुपये की वृद्धि दर्ज की है। वाईआईएल के प्रमुख उत्पादों में कार्बन फाइबर कंपोजिट, मध्यम और बड़े कैलिबर गोला-बारूद के लिए असेंबली उत्पाद, बख्तरबंद वाहनों के लिए असेंबली उत्पाद, तोपखाने और मुख्य युद्धक टैंकों (एमबीटी) के लिए असेंबली उत्पाद, ग्लास कंपोजिट, एल्युमीनियम मिश्र धातु आदि शामिल हैं।

मिनीरत्न (श्रेणी-I) का दर्जा मिलने से वाईआईएल के बोर्ड ​को सरकार की मंजूरी के बिना नए प्रोजेक्ट, आधुनिकीकरण, उपकरण खरीद आदि पर 500 करोड़ रुपये तक का पूंजीगत व्यय करने का अधिकार प्राप्त हो गया है। इससे कंपनी को रक्षा उत्पादन और निर्यात में तेज विकास तथा नई ऊंचाइयों को प्राप्त करने में और अधिक सहायता मिलेगी।​ सरकार के इस फैसले में रक्षा विनिर्माण, अनुसंधान और रणनीतिक प्रौद्योगिकियों में स्वदेशी क्षमताओं के निर्माण पर विशेष जोर दिया गया है। यह​ निर्णय व्यापक रक्षा सुधारों के अनुरूप है, जिनका उद्देश्य आयात पर निर्भरता कम करना, घरेलू रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देना, भारतीय उद्योग की भागीदारी को प्रोत्साहित करना और भारत को वैश्विक रक्षा विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करना है।​

रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में कार्यात्मक स्वायत्तता, दक्षता बढ़ाने और नवाचार एवं विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सरकार ने पूर्ववर्ती आयुध कारखाना बोर्ड (ओएफबी) का निगमीकरण करके सात नए रक्षा उपक्रमों (डीपीएसयू) का गठन किया था। वाईआईएल नवगठित अनुसूची ‘ए’ के ​​डीपीएसयू में से एक है, जो रक्षा उत्पादन विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्यरत है। मई 2025 में रक्षा मंत्री ने इन सात डीपीएसयू में से तीन​ मुनिशन्स इंडिया लिमिटेड, आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड और इंडिया ऑप्टेल लिमिटेड को मिनीरत्न-I (Defence Minister approved granting Mini-Ratna-I status to three of these seven DPSUs: Munitions India Limited, Armoured Vehicles Nigam Limited) का दर्जा देने की मंजूरी दी थी

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