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यह पुस्तक गांधी द्वारा प्रतिपादित चारित्रिक, शैक्षिक, सामाजिक एवं राजनीतिक मूल्यों को समाहित किए हुए है। इन मूल्यों में जो विकृति आई है, उसे दूर करने के लिए हमें लगता है कि गांधी को समझने और उन्हें अपनाने का यही समय सबसे उपयुक्त है। वैसे भी महात्मा गांधी वह महामानव हैं जिनकी प्रासंगिकता हर दौर में बनी रहेगी। गांधी जी के विचार उनके व्यक्तित्व की तरह सी आज भी उतनी महत्ता रखते हैं जितनी तत्कालीन समय में थे। ऐसे में हमारा ये नैतिक दायित्व बनता है कि आज के भारत को गांधी को एक संवेदनशील महामानव के रूप में समझाया जाये, उस महामानव के रूप में जिसने मनुष्य और मानवता के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। वर्तामन में विश्व पटल पर राष्ट्रपिता गांधी की उपस्थिति पहले से कहीं ज्यादा विराट ही हुई है। दुनिया के कई विश्वविद्यालयों में उन पर शोध किया जा रहा है। उन पर पाठ्यक्रम बनाए गए हैं। पिछले 100 वर्षो में उनकी सैकड़ों जीवनियां आ चुकी हैं। ऐसे में यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि अब गांधीजी की जीवनी में लिखने को बचा क्या है? इसके बावजूद इंडिया ग्राउंड रिपोर्ट टीम ने उन पर पुस्तक लिखी है। दरअसल ‘अपने-अपने गांधी’ कोई पुस्तक नहीं है बल्कि राष्ट्रपिता गांधी को समझने का एक प्रयास है। एक ऐसा प्रयास जो गांधी के जीवन दर्शन का परिचय कराता है। गांधी हर भारतवासी को अपने जीवन का एक अंश दे गए हैं। इस पुस्तक में हमने उन्हीं अंशों को जगह देने का प्रयास किया है।